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अनिल दवे की वसीयत में भी पर्यावरण रक्षा का संदेश

 Written By: IANS
 Published : May 18, 2017 06:13 pm IST,  Updated : May 18, 2017 06:26 pm IST

उन्होंने अपनी जो वसीयत (सोशल मीडिया पर वायरल) छोड़ी है, उसमें साफ तौर पर लिखा है कि पेड़ लगाएंगे तो मुझे आनंद मिलेगा।

anil dave- India TV Hindi
anil dave

भोपाल: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे की पहचान एक राजनेता से कहीं ज्यादा पर्यावरण हितैषी और रक्षक की रही है। नदियों के संरक्षण के बड़े पैरोकार दवे ने अपनी वसीयत में भी पेड़ लगाने का आह्वान किया है। 

दवे नदी और पर्यावरण के कितने बड़े हितैषी हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपनी जो वसीयत (सोशल मीडिया पर वायरल) छोड़ी है, उसमें साफ तौर पर लिखा है कि पेड़ लगाएंगे तो मुझे आनंद मिलेगा। उन्होंने 23 जुलाई, 2012 को जो वसीयत (विल) लिखी है, उसमें कहा गया है, 'संभव हो तो मेरा दाह संस्कार बांद्राभान में नदी महोत्सव वाले स्थान पर किया जाए। उत्तर क्रिया के रूप में केवल वैदिक कर्म ही हों, किसी भी प्रकार का दिखावा न किया जाए।'

आगे लिखा है, 'मेरी स्मृति में कोई भी स्मारक, प्रतियोगिता, पुरस्कार, प्रशिक्षण इत्यादि का आयोजन न किया जाए। जो मेरी स्मृति में कुछ करना चाहते हैं, वे कृपया वृक्ष लगाने और उनकी रक्षा करने का कार्य करेंगे तो मुझे आनंद होगा। वैसे भी नदी-जलाशयों के संरक्षण में अपनी सामथ्र्य अनुसार अधिकतम सहयोग भी प्रदान किए जा सकते हैं, ऐसा करते हुए भी मेरे नाम के प्रयोग से बचेंगे।'

दवे के नर्मदा प्रेम को इस बात से भी समझा जा सकता है कि वह स्वयं नौ मई को नर्मदा सेवा यात्रा में शामिल हुए थे और उन्होंने 15 मई को अमरकंटक में आयोजित समारोह के प्रधानमंत्री के सात ट्वीट को री-ट्वीट किया था। उसके बाद से उन्होंने कोई ट्वीट नहीं किया। एक तरफ पर्यावरणविद और रक्षक का दुनिया से जाने से जहां राजनीतिक जगत और पर्यावरण हितैषी दुखी है, वहीं उनकी वसीयत ने आम लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी है।

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