नई दिल्ली: अहमदाबाद की सेशंस कोर्ट ने गुलबर्ग सोसायटी दंगा केस में 24 दोषियों के सजा का ऐलान कर दिया है। अदालत ने शुक्रवार को 11 दोषियों को उम्रकैद, 12 दोषियों को 7-7 साल और एक दोषी को 10 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने दो जून को इस मामले में हत्या और अन्य अपराधों के लिए 11 व्यक्तियों को दोषी ठहराया था जबकि विहिप नेता अतुल वैद्य सहित 13 अन्य पर कम गंभीर अपराधों के आरोप लगाए हैं। साथ ही अदालत ने मामले में 36 अन्य लोगों को बरी कर दिया था। दोनों पक्षों, बचाव पक्ष के वकीलों और पीड़ितों के वकीलों की दलीलों पर विचार करने के बाद पिछले सप्ताह शुक्रवार को अदालत ने सजा की मात्रा पर जिरह पूरी की थी।
जिरह के दौरान, विशेष लोक अभियोजक और उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त विशेष जांच दल के लिए वकील आर सी कोडेकर ने अदालत से कहा था कि सभी 24 दोषियों को मृत्युदंड या मौत होते तक जेल में रहने की सजा से कम दंड नहीं दिया जाना चाहिए। कोडेकर ने कहा कि सभी 24 दोषी धारा 149 के तहत अपराध के दोषी पाए गए हैं और सजा का ऐलान करते समय इस बात को ध्यान में रखा जाना जरूरी है।
इस दंगे में कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी सहित 69 लोगों की हत्या कर दी गई थी। अदालत ने पिछले 2 जून को कुल 66 आरोपियों में से 24 को दोषी ठहराया था, जबकि 36 को बरी कर दिया था। 6 आरोपियों की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।
27 फरवरी 2002 में गोधरा कांड के बाद उत्तेजित लोगों ने गुलबर्ग सोसायटी में तबाही मचाई थी, जिसमें कांग्रेस के पूर्व सांसद अहसान जाफरी सहित 69 लोगों की जान चली गयी थी। अहमदाबाद शहर में हुए दंगे के बाद दंगाइयों ने गुलबर्ग सोसायटी पर हमला बोल दिया था, जहां कांग्रेस के पूर्व सांसद एहसान जाफरी अपने परिवार के साथ रहा करते थे।