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गुजरात: राजकोट के बैंक में हुई 871 करोड़ रुपये की संदिग्ध हेराफेरी

 Written By: Bhasha
 Published : Jan 08, 2017 03:55 pm IST,  Updated : Jan 08, 2017 03:55 pm IST

आयकर विभाग ने राजकोट के एक सहकारी बैंक में भारी कथित विसंगतियों का पता लगाया है जहां 8 नवंबर की नोटबंदी के बाद 871 करोड़ रुपये जमा किए गए, 4,500 नए खाते खोले गए और एक ही मोबाइल नंबर से पांच दर्जन से अधिक खाते शुरू किए।

Representative Image | PTI- India TV Hindi
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नई दिल्ली: आयकर विभाग ने राजकोट के एक सहकारी बैंक में भारी कथित विसंगतियों का पता लगाया है जहां 8 नवंबर की नोटबंदी के बाद 871 करोड़ रुपये जमा किए गए, 4,500 नए खाते खोले गए और एक ही मोबाइल नंबर से पांच दर्जन से अधिक खाते शुरू किए। यह नोटबंदी के बाद कालाधन बनाने के सबसे बड़े मामलों में एक है। विभाग की अहमदाबाद अन्वेषण शाखा ने कर नियमों के तहत कार्रवाई शुरू की है तथा बैंक से पूरा ब्योरा मांगा है। उसने कुछ समय पहले उसका सर्वेक्षण किया था और भारी विसंगतियां पाई थीं। 

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अधिकारियों ने बताया कि विभाग की अब तक की जांच के अनुसार पिछले साल 9 नवंबर और 30 दिसंबर के बीच 871 करोड़ रुपये जमा किए गए जिनमें ज्यादातर 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट थे। उसी अवधि में 108 करोड़ रुपये संदिग्ध तरीके से निकाले गए। यह रकम 2015 की समान अवधि से काफी ज्यादा थीं। जांच दल ने नोटबंदी के बाद जमा की गई कम से कम 25 बड़ी राशियों की पहचान की जहां कथित कमजोर KYC नियमों से कथित संदिग्ध एवं असंतोषजनक तरीके से 30 करोड़ रुपये का विनिमय हुआ। आईटी विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार नोटबंदी के बाद कई निष्क्रिय खातों में 10 करोड़ रुपये जमा किए गए। उनमें एक पेट्रोलियम फर्म का खाता था जिसमें 2.53 करोड़ रुपये जमा किए गए।

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जिस बात ने कर अधिकारी को चौंका दिया, वह यह था कि नोटबंदी के बाद 4,551 नए खाते खोले गए जबकि पूरे साल में सामान्यत: औसत 5,000 ऐसे खाते खुले। 62 खाते तो एक ही मोबाइल नंबर से खोले गए। यह भी पता चला कि जमा करने के लिए भरी गई पर्चियों में भारी विसंगतियां थीं। एक में भी पैन नंबर नहीं दिया गया था। कई में तो जमाकर्ता के हस्ताक्षर भी नहीं थे। किसी भी पर्ची में इन रकम के स्रोत का दर्शाने वाले दस्तावेज नहीं थे। रिपोर्ट में कहा गया है, ‘पाया गया कि बैंक के पूर्व निदेशक के बेटे को 30 बैंक खातों में नकद जमा से एक करोड़ रुपये मिले। सारी जमा पर्चियां एक ही व्यक्ति ने भरीं। बैंक के उपाध्यक्ष की मां को भी 64 लाख रपये नकद जमा मिले जिसे आखिरकार एक ज्वैलर को ट्रांसफर किया गया।’

रिपोर्ट के मुताबिक, पैसों का लेन-देन RTGS और अन्य बैंकिंग ट्रांजैक्शन उपायों से हुआ। अधिकारियों ने कहा कि इन दोनों लोगों के बयान शीघ्र ही दर्ज किए जाएंगे। रिपोर्ट में एक खास घटना का जिक्र है जिसके अनुसार नए खातों में जमा की गई बड़ी रकम का संबंध साझे पते और फोन नंबर से था। अधिकारियों ने कहा कि राजकोट के इस सहकारी बैंक का मामला अति महत्वपूर्ण मामलों में एक बन गया है जहां नोटबंदी क बाद भारी मात्रा में कालेधन का सृजन एवं विनिमय हुआ। विभाग कई ऐंगल्स से इसकी जांच कर रहा है।

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