नई दिल्ली: इशरत जहां के कथित फर्जी मुठभेड़ मामले से जु़ड़ी फाइलें गायब हो जाने की जांच कर रहा केंद्रीय गृहमंत्रालय का एक सदस्यीय जांच पैनल अगले कुछ दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा। तमिलनाडु संवर्ग के आईएएस अधिकारी बी के प्रसाद को इस जांच की जिम्मेदारी सौंपी गयी है। संयोग से वह इस माह के आखिर तक सेवानिवृत भी होने वाले हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस माह के आखिर तक यह रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।
संसद में हंगामे के बाद 14 मार्च को गठित इस पैनल को उन स्थितियों की जांच करने को कहा गया था जिनमें इशरत जहां से जुड़ी अहम फाइलें गायब हो गयीं। इशरत जहां वर्ष 2004 में गुजरात में कथित फर्जी मुठभेड़ में मारी गईं थीं। पैनल से फाइलें और प्रासंगिक मुद्दों को रखने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति का पता लगाने को कहा गया है। केंद्रीय गृहमंत्री ने 10 मार्च को संसद में खुलासा किया था कि फाइलें गायब हैं।
सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृहमंत्रालय से जो कागजात गायब हैं, उनमें अटार्नी जनरल द्वारा परखे गए और वर्ष 2009 में गुजरात उच्च न्यायालय में दायर हलफनामे की प्रति और दूसरे हलफनामे का मसौदा , जिसमें बदलाव किए गए थे, शामिल हैं। सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन गृह सचिव जी के पिल्लै द्वारा तत्कालीन अटार्नी जनरल जी ई वाहनवती को लिखे गए दो पत्रों और मसविदा हलफनामे की प्रति का अबतक पता नहीं चला है।
सूत्रों के अनुसार पहला हलफनामा खुफिया ब्यूरो के अलावा महाराष्ट्र एवं गुजरात पुलिस से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर दायर किया था जिसमें यह कहा गया था कि मुम्बई के बाहरी इलाके की 19 वर्षीय यह लड़की लश्कर ए तैयबा की कार्यकर्ता थी लेकिन दूसरे हलफनामे में इसकी अनदेखी की गई। सूत्रों के अनुसार दूसरे हलफनामे का मसौदा तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदम्बरम द्वारा तैयार किए जाने का दावा है। उसमें कहा गया कि यह साबित करने के लिए कोई निर्णायक सबूत नहीं है कि इशरत एक आतंकवादी थी।
पिल्लै ने दावा किया था कि चिदम्बरम ने मूल हलफनामा अदालत में दायर करने के एक महीने बाद फाइल मंगवाई थी। मूल हलफनामे में कहा गया था कि इशरत और उनके अन्य साथी लश्कर के सदस्य थे। बाद में चिदम्बरम ने कहा था कि पिल्लै हलफनामे में बदलाव के लिए समान रूप से जिम्मेदार हैं। इशरत, जावेद शेख उर्फ प्रणेश पिल्लै, अमजदअली अकबरअली राणा और जीशान जोहार 15 जून, 2004 को अहमदाबाद के बाहरी इलाके मे गुजरात पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। गुजरात पुलिस ने तब कहा था कि मुठभेड़ में मारे गए लोग लश्कर आतंकवादी थे ओर वह गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने के लिए गुजरात पहुंचे थे।