नई दिल्ली: 30 सितम्बर 2010 को इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ बेंच ने विवादित जमीन पर भगवान राम का जन्मस्थान बताते हुए विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीन हिस्से में बांटने के लिए आदेश दिया था। इसमें एक तिहाई हिस्सा रामलला को एक पार्टी के तौर पर मिला, एक तिहाई हिस्सा निर्मोही अखाडा को और बाकि एक तिहाई सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड को देने का आदेश हुआ था। हाई कोर्ट के इस फैसले को सभी पक्षों ने साल 2010 के आखिर में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को अंतिम फैसला आने तक हाई कोर्ट के फैसले पर लागू होने से रोक लगा दी थी। तब से ये अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। बीच बीच में इस केस की सुनवाई की तारीख होती है लेकिन दोनों पक्षों की ओर से तकनिकी औपचारिकता पूरी नहीं हुए पाने के आधार पर इसकी सुनवाई टलती रही है।
पिछले साल सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इस मामले में खुद को भी एक पार्टी के तौर पर शामिल करने की याचिका दी थी, जिसपर कोर्ट ने उन्हें इस केस में एक पार्टी बनने की इजाज़त दे दी है। पिछ्ले कुछ महीनों से सुब्रह्मण्यम स्वामी सुप्रीम कोर्ट से मांग कर रहे है कि 2010 से सुप्रीम कोर्ट में लंबित इस केस की जल्द सुनवाई हो और सुप्रीम कोर्ट इसकी रोजाना सुनवाई करे। सुप्रीम कोर्ट ने स्वामी से कहा था कि इस केस के दोनों पक्षों की ओर से अगर ये मांग आये तो कोर्ट जल्द सुनवाई को तैयार हो सकती है।
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने फिर अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई की मांग को लेकर गुहार लगायी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जे.एस. खेहर की अध्यक्षता में तीन जजों की खंडपीठ ने स्वामी की मांग पर कहा कि ये मामला बेहद संवेदनशील और भावनात्मक है। बेहतर होगा अगर दोनों पक्ष इसे कोर्ट की बजाय आपसी बातचीत से सुलझा ले। चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर दोनों पक्ष चाहें तो वो खुद या सुप्रीम कोर्ट का कोई दूसरा जज इस केस में मध्यस्थ बनने को राजी हैं। कोर्ट का कहना था कि अगर बातचीत से कोई हल नहीं निकलेगा तो फिर कोर्ट इस केस के तथ्यों के आधार पर सुनवाई करेगी लेकिन ऐसे हालात में फिर सभी को बाध्य होकर फैसला मानना होगा।
सुप्रीम कोर्ट के बातचीत के जरिये इस मसले को हल करने के सुझाव का सबने स्वागत किया है। केंद्र में कानून राज्य मंत्री पी.पी. चौधरी , गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर समेत कई नेताओं ने कहा कि इस मसले को बातचीत के जरिये सुलझाने की कोशिश होनी चाहिए।
31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुब्रह्मण्यम स्वामी ये बताएंगे कि क्या कोई बातचीत की संभावना है या कोर्ट इस मामले की सुनवाई करे। मुस्लिम पक्ष के सभी नेता बातचीत के जरिये इस मसले के हल निकलने की संभावना को ख़ारिज कर रहे हैं।