नई दिल्ली: केंद्र सरकार जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेताओं की विदेश यात्रा कठिन बनाकर तथा उनकी सुरक्षा कम कर उनके प्रति अपना रूख कड़ा कर सकती है। सरकारी खजाने की कीमत पर उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाती है।
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अलगाववादियों का पासपोर्ट ले सकती है सरकार
सांसदों की अलगाववादियों द्वारा जानबूझकर अनदेखी किये जाने से नाखुश केंद्र कुछ मामलों में उनका पासपोर्ट वापस लेकर तथा यात्रा दस्तावेजों से इनकार कर उनकी विदेश यात्राओं पर अंकुश लगाने के कदमों पर विचार कर रहा है। राज्य के दौरे पर गए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के कुछ सांसदों ने अलगाववादियों से मिलने की कोशिश की थी।
खत्म हो सकती हैं अलगावादियों की सुविधाएं
सरकारी सूत्रों ने बताया कि इसके अलावा, केंद्र उनके बैंक खातों को भी खंगालेगा तथा उनके विरूद्ध दर्ज मामलों की लंबित जांच भी पूरी करेगा ताकि जमीनी स्तर पर इस बात का कड़ा संदेश जाए कि कश्मीर घाटी में आठ जुलाई को हिज्बुल मुजाहिदीन कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से अशांति पैदा करने के लिए युवकों को भड़काने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
कल सर्वदलीय बैठक के बाद कड़े फैसले की उम्मीद
कश्मीर पर कल सरकार बड़ा फैसला कर सकती है। कल सुबह 11 बजे ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई गई है। इस मीटिंग के बाद सरकार अलगाववादी नेताओं के खिलाफ कड़े एक्शन लेने की तैयारी करेगी। सरकार का प्लान है कि अलगाववादी नेताओं से पासपोर्ट वापस लिए जाएं, जिससे उनके विदेश दौरों पर पाबंदी लगे। सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक, यासीन मलिक जैसे अलगाववादी नेताओं की सिक्योरिटी को हटाया जाए।
अलगाववादी नेताओं पर हर साल 500 करोड़ से ज्यादा होता है खर्च
फिलहाल अलगाववादी नेताओं की सिक्युरिटी में 900 से ज्यादा जवान तैनात हैं और हर साल पांच सौ करोड से ज्यादा खर्च होते हैं। इन लीडर्स को मिलने वाली कई सुविधाएं को बंद किया जाएगा। केंद्र सरकार इन अलगाववादी नेताओं को मिलने वाली हवाई टिकट, कश्मीर से बाहर जाने पर होटल में ठहरने का खर्च और गाड़ियों जैसी सुविधाएं वापस ले लेंगी।