नई दिल्ली:जेल से जमानत पर रिहाई के बाद सिवान के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन ने इंडिया टीवी के संवाददाता से कहा कि मुझे बदलने की जरूरत नहीं है। अगर मेरे लोग मुझे इसी रूप में पसंद करते हैं तो मैं ऐसे ही रहूंगा।
इससे पहले 2005 में इंडिया टीवी के आपकी अदालत कार्यक्रम में शहाबुद्दीन ने कहा था कि मेरे घर में 1932 से बंदूकें हैं। जिस परिवार में 1932 से बंदूकें रही होंगी वह परिवार कैसा रहा होगा आप खुद अंदाजा लगा सकते हैं। यह खुद शहाबुद्दीन के बोल थे जो उसने कैमरे के सामने कहा था।
1986 में शहाबुद्दीन पर पहला आपराधिक केस दर्ज हुआ था। शहाबुद्दीन पर अबतक 39 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। 3 मामलों में निचली अदालत से मिल चुकी है सजा।
राज्य सरकार ने रिहाई में की मदद?
फरवरी में पटना हाईकोर्ट ने राजीव रोशन हत्याकांड का ट्रायल पूरा करने के लिए राज्य सरकार को 9 महीने का समय दिया था। विपक्षी नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार ने शहाबुद्दीन को फायदा पहुंचाने के लिए ट्रायल शुरू ही नहीं किया। इसका पूरा फायदा शहाबुद्दीन को मिला और उसे कोर्ट से जमानत मिल गई।
क्या था राजीव रोशन हत्याकांड
राजीव रोशन अपने दो छोटे भाइयों को तेजाब से नहलाकर मारने के केस में शहाबुद्दीन के खिलाफ अहम गवाह था। उसे शहाबुद्दीन के समर्थकों ने गवाही नहीं देने के लिए धमकी भी दी थी। 2014 में शहाबुद्दीन के खिलाफ गवाही देने पर राजीव रोशन की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इससे पहले 2004 में राजीव रोशन के दो छोटे भाइयों की हत्या तेजाब से नहलाकर कर दी थी। इस हत्याकांड का आरोप शहाबुद्दीन और उसके समर्थकों पर लगा था। यह पूरी घटना राजीव रोशन की आंखों के सामने हुई थी। राजीव वहां से किसी तरह निकल भागने में सफल रहा था। शहाबुद्दीन के जेल जाने के बाद वह इस केस में इंसाफ की उम्मीद में अदालतों के चक्कर काट रहा था। लेकिन 2014 में राजीव रोशन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
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