नई दिल्ली: पोखरण 11 मई 1998 को हुए परमाणु परीक्षण के आज 19 साल पूरे हो गए। इसके वर्षगांठ के तौर पर मनाए जाने वाले ‘राष्ट्रीय प्रोद्यौगिकी दिवस (नेशनल टेक्नोलॉजी डे)’ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा किए गए उस पहल के लिए उनके साहस और हिम्मत की तारीफ की। उन्होंने ट्वीट कर कहा, आज नेशनल टेक्नोलॉजी डे के मौके पर हर किसी को विशेषकर हमारे मेहनती वैज्ञानिकों को मेरा नमस्कार। पोखरण में वर्ष 1998 में साहस का परिचय देने वाले अपने वैज्ञानिकों व तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व के प्रति हम आभारी रहेंगे। (ये भी पढ़ें: बंद होंगे 2000 के नोट, मोदी सरकार फिर करेगी नोटबंदी?)
आज ही के दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जैसे ही तीन न्यूक्लियर परीक्षण सफल होने की घोषणा की तो अमेरिका सहित पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई थी। क्या आपको पता है कि इस परीक्षण में ‘प्याज’ का भी इस्तेमाल हुआ था?
जी हां...यह सच है। 11 मई 1998 की सुबह थार के रेगिस्तान में पोखरण में खेतोलाई गांव के पास भारत ने अपना दूसरा परमाणु परीक्षण किया था। भारतीय वैज्ञानिकों ने जिस शॉफ्ट में परमाणु बम का धमाका किया गया उसका कोड नाम वाइट हाउस रखा गया था। भारत ने 58 किलोटन क्षमता के परमाणु बम का परीक्षण कर सभी को चौंका दिया था। यह अमेरिका की ओर से दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के हिरोशिमा में गिराए गए परमाणु बम लिटिल बॉय से चार गुना अधिक शक्तिशाली था।
पोखरण में किए गए दोनों परमाणु परीक्षणों में प्याज की भूमिका बेहद अहम रही थी। इन परीक्षणों में भारी मात्रा में प्याज का इस्तेमाल किया गया। भारत के दूसरे परमाणु बम परीक्षण में मुख्य भूमिका निभाने वाले वैज्ञानिक अनिल काकोडकर ने एक बार स्वीकार किया था कि हां, प्याज का उपयोग किया गया।
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