
परमाणु परीक्षण के लिए वाइट हाउस नामक पहली शॉफ्ट को 208 मीटर गहरा खोदा गया। इसमें पहले कुछ प्याज भरे गए। फिर डेढ़ सौ मीटर की गहराई पर बम को लगाया गया। बम के ऊपर मिट्टी के साथ प्याज भरे गए। इसके बाद सतह पर शॉफ्ट के निकट प्याज बिछाए गए।
जोधपुर प्रमुख प्याज उत्पादक जिला है और इस परीक्षण से काफी पहले सेना सहित कुछ एजेंसियों ने सुनियोजित तरीके से बड़ी मात्रा में प्याज की खरीद शुरू कर दी थी। इस प्याज को लगातार कई दिन तक किश्तों में पोखरण पहुंचाया जाता रहा, ताकि किसी को भनक नहीं लगे कि एक साथ इतना प्याज क्यों पोखरण पहुंचाया जा रहा है।
परमाणु विस्फोट के पश्चात अल्फा, बीटा व गामा रेज निकलती है। इनमें से गामा रेज को सबसे घातक माना जाता है। गामा रेज शरीर के अंदर तक प्रवेश कर टीशू को नष्ट करना शुरू कर देती है। भौतिक वैज्ञानिकों का मानना है कि प्याज गामा रेज को बहुत अच्छी तरह से सोख लेता है। इस कारण ये ज्यादा दूरी तक नहीं फैल पाती। पोखरण में परमाणु विस्फोट के दौरान इसी उद्देश्य से प्याज को परीक्षण वाले शॉफ्ट में भरा गया। साथ ही इस शॉफ्ट के चारों तरफ भारी मात्रा में इसे बिछाया गया।