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देश में हरित क्रांति के प्रभावों की कठोर समीक्षा हो: संघ महासचिव

 Written By: Bhasha
 Published : May 13, 2016 05:39 pm IST,  Updated : May 13, 2016 05:55 pm IST

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव, सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा कि हमने हरित क्रांति के नाम पर जिन कृषि नीतियों को स्वीकार किया, उनसे किसान स्वावलंबन खो बैठे।

Green Revolution
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उन्होंने कथित मुनाफाखोर प्रवृत्ति अपनाने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों पर हमला करते हुए कहा कि ब्रांडेड चीजें खरीदना एक किस्म का वैचारिक प्रदूषण है और वे स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देकर अगले तीन से पांच सालों में इन कम्पनियों को शीर्षासन करा देंगे। रामदेव ने यह घोषणा भी की कि अब वह हाथ से बने सूती कपड़े ही पहनेंगे।

मशहूर पर्यावरण कार्यकर्ता वंदना शिवा ने दावा किया कि रासायनिक खेती से देश के खेतों में जहर फैल रहा है और इस खेती के अलग-अलग दुष्प्रभावों के कारण हर साल करीब 70 अरब रुपए बर्बाद हो रहे हैं। उन्होने बहुराष्ट्रीय कम्पनियों द्वारा बीजों की बिक्री पर रॉयल्टी वसूले जाने का विरोध करते हुए कहा कि देश की बीज विविधता, जैव विविधता और खाद्य सुरक्षा को विदेशी कम्पनियों से सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

बहस में शामिल होते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि रासायनिक खेती पूरी तरह ठीक नहीं है। लेकिन खेती के इस तरीके को रातों रात नहीं बदला जा सकता। इसलिए राज्य सरकार कृषि की पारंपरिक तकनीकों पर आधारित आदर्श कृषि फार्म विकसित करेगी, ताकि लोगों के सामने खेती के वैकल्पिक उदाहरण पेश किए जा सकें। इसके साथ ही, प्रदेश में मिश्रित खेती अलग-अलग फसलों की एक साथ खेती को बढ़ावा दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने जैविक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत पर जोर देते हुए सवाल किया, जब सरकार रासायनिक खाद पर सब्सिडी दे सकती है, तो जैविक खाद पर सब्सिडी क्यों नहीं दी जा सकती। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र की ऐसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को देश से बाहर किया जाएगा जिनका एकमात्र उद्देश्य मुनाफा कमाना है।

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