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जंतर-मंतर के जिन प्रदर्शनकारियों पर FIR हो चुकी है, अब उन्हें वापस कैसे लें? क्या है कानूनी प्रक्रिया? स्टेप-बाय-स्टेप समझिए

 Reported By: Kumar Sonu Written By: Khushbu Rawal
 Published : Jul 27, 2026 05:36 pm IST,  Updated : Jul 27, 2026 05:41 pm IST

केंद्र सरकार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई को पार्लियामेंट तक मार्च करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज न करने को लेकर सहमति जताई थी। तो आइए आपको बता दें कि जिन प्रदर्शनकारियों पर FIR हो चुकी है, अब उन्हें वापस लेने की कानूनी प्रक्रिया क्या है।

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जंतर मंतर प्रदर्शन। Image Source : PTI

केंद्र सरकार ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वालों और 20 जुलाई को संसद तक मार्च में शामिल होने वालों के खिलाफ केस दर्ज न करने को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर थे। इसके बाद  केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी मेदांता अस्पताल में सोनम वांगचुक ने अपना अनशन खत्म किया था। केंद्र सरकार ने वांगचुक को भरोसा दिया था कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर कार्रवाई नहीं होगी। साथ ही जिन प्रदर्शनकारियों पर FIR हुई है, उन्हें वापस लिया जाएगा।  

आंदोलन के दौरान कितने केस दर्ज?

13 जून 2026 से 25 जुलाई 2026 तक जंतर-मंतर पर 36 दिन चले आंदोलन के दौरान केवल दिल्ली में ही 15-20 FIR दर्ज होने का दावा किया गया है। सरकार ने इन मामलों को वापस लेने पर सहमति जताई है, लेकिन ये मुकदमे वापस लेने के लिए तय कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी। सबको एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया से ही गुजरना पड़ता है।

FIR वापस कैसे होगी?

  1. सरकार की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद केस वापसी की एक तय कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। जैसे ही आदेश आएगा उसके बाद कानूनी तरीके इस पर करवाई होगी।
  2. सरकार का आदेश मिलने के बाद स्टेट यानि अभियोजन (दिल्ली पुलिस )की तरफ से मामले वापस लेने को लेकर LG को पत्र लिखा जाएगा और कहा जाएगा कि इन मामलों में हमें आगे करवाई नहीं करनी है।
  3. इसके बाद LG का अप्रूवल आयेगा, एलजी का अप्रूवल आने के बाद पुलिस सम्बन्धित कोर्ट को बताएगी कि इन मामलों में हमें आगे प्रॉसिक्यूट नहीं करना है। उसके बाद कोर्ट पर निर्भर करता है कि वो इस पर आगे क्या आदेश दे।
  4. अदालत की अंतिम मुहर- पुलिस के इस आवेदन के बाद, केस को पूरी तरह से रद्द या वापस करने का अंतिम फैसला अदालत के आदेश पर ही निर्भर करेगा। इन मामलों में पत्रकारों ने खुद पर हमलों के केस दर्ज कराये है वो केस वापस नहीं होंगे।
  5. जंतर मंतर हिंसा और इससे जुड़े अन्य मामलों में करीब 20 केस दर्ज हुए हैं। इनमें 14 केस प्रोटेस्ट और हिंसा से जुड़े हैं। 1 बिना अनुमति के ड्रोन उड़ाने के और बाकी केस पत्रकारों और पुलिस के खुद के साथ हुई मारपीट के दर्ज कराए हैं।

इसके अलावा अगर मुख्य प्रक्रिया में कोई बाधा आती है, तो कानून में कुछ अन्य रास्ते भी हैं, हालांकि वे थोड़े अलग हैं।

केस वापसी के 3 अन्य कानूनी विकल्प क्या है?

  • पुलिस द्वारा क्लोजर रिपोर्ट- सरकार राजनीतिक फैसला न लेकर पुलिस को निष्पक्ष समीक्षा का निर्देश दे सकती है। यदि कोर्ट में चार्जशीट दाखिल नहीं हुई है और पुलिस को लगता है कि छात्रों के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं या केस केवल प्रदर्शन के कारण दर्ज हुआ था, तो पुलिस अदालत में फाइनल रिपोर्ट या क्लोजर रिपोर्ट लगा देती है। मजिस्ट्रेट के इसे स्वीकार करते ही केस खत्म हो जाता है।
  • हाईकोर्ट से सीधे रद्द कराना- अगर धाराएं गंभीर हैं या निचली अदालत राहत नहीं देती, तो छात्र या सरकार सामूहिक रूप से हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। नए कानून BNSS की धारा 528 के तहत हाईकोर्ट को विशेषाधिकार है कि वह राजनीति से प्रेरित या फर्जी FIR को एक झटके में पूरी तरह रद्द कर सकता है।
  • लोक अदालत- रास्ता रोकना, धारा 144 का उल्लंघन या बिना अनुमति प्रदर्शन जैसे छोटे मामलों को सरकार और छात्र आपसी सहमति से ‘लोक अदालत’ में ले जाकर एक ही दिन में सामूहिक रूप से रफा-दफा कर सकते हैं।

वहीं, बिहार में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा AK-47 से गोली चलाने और लाठीचार्ज करने को लेकर अब NDA के सांसद ही विरोध में उतर आए हैं। एनडीए सांसद ने कहा कि हम इसके विरोध में हैं।

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