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‘बेगम जान’ की जमीन की कहानी जहां जिस्मफ़रोशी के लिए टके में बिकती है बच्चियां...

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 13, 2017 07:51 am IST,  Updated : Apr 13, 2017 07:54 am IST

फिल्म बेगम जान में विद्या बालन एक वेश्यालय की मुखिया का किरदार निभा रही हैं। इस फिल्म में वो जिस कोठे के लिए संघर्ष करती नजर आ रही हैं, वह जमीन के उसी टुकड़े की याद दिलाता है जिस पर आज भी देह-व्यापार के लिये लाखों लड़कियां बेची और ख़रीदी जाती हैं।

Begum Jaan Sonagachi- India TV Hindi
Begum Jaan Sonagachi

नई दिल्ली: फिल्म बेगम जान में विद्या बालन एक वेश्यालय की मुखिया का किरदार निभा रही हैं। इस फिल्म में वो जिस कोठे के लिए संघर्ष करती नजर आ रही हैं, वह जमीन के उसी टुकड़े की याद दिलाता है जिस पर आज भी देह-व्यापार के लिये लाखों लड़कियां बेची और ख़रीदी जाती हैं। जी हां...हम बात कर रहे हैं कोलकाता के सोनागाछी की। यहां बच्ची के पैदा होते ही उसकी क़िस्मत का फ़ैसला हो जाता है कि उसे आगे चलकर क्या काम करना है।

भारत के सबसे बड़े रेड लाइट एरिया में नाबालिग लड़कियों को जबरन देह व्यापार में धकेल दिया जाता है जहां बच्चियां 120 रुपए में बेच दी जाती हैं जिनकी उम्र 18 साल से भी कम होती है। सोनागाछी जिला कोलकाता का एक स्लम एरिया है और यहां ग़रीबी ज़्यादा है। इस कारण परिवार अपनी कम उम्र की बच्चियों को जिस्मफ़रोशी के काम में लगाने पर मजबूर हो जाते हैं। अगर कोई नाबालिग बच्ची इसका विरोध करती है तो उसके साथ ज़ोर-ज़बर्दस्ती की जाती हैं।

सोनागाछी स्लम भारत ही नहीं, एशिया का सबसे बड़ा रेड-लाइट एरिया है। यहां कई गैंग हैं जो इस देह-व्यापार के धंधे को चलाते हैं। इस स्लम में 18 साल से कम उम्र की क़रीब 12 हज़ार लड़कियां देह व्यापार में शामिल हैं। उन्‍हें बचपन से ही वो सब देखना पड़ता है  जि‍सके बारे में सोचने पर हमारी रुह कांप जाए। ये काम इतना बुरा है कि इसमें मजबूरन पड़ने वाली लड़कियों के लिए बदनसीब शब्द भी बहुत हल्का है।

जिस उम्र में हमारी मां हमें दुनिया के रीति-रिवाज, लाज-शरम सिखाती हैं वहीं ये बच्चियां खुद को बेचने का हुनर सीखती हैं। 12 से 17 साल की उम्र में ये लड़कियां सीख जाती हैं कि मर्दों की हवस कैसे मिटाई जाती है। इसके बदले उन्हें 274 रुपए मिलते हैं। इन रूपयों के बदले यहां की बच्चियां मर्दों की टेबल पर तश्तरी में खाने की तरह परोस दी जाती हैं।

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