नई दिल्ली: तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर सचित्र चेतावनी प्रकाशित करने आदेश को आज से लागू करने से केंद्र सरकार द्वारा टाल दिए जाने के फैसले पर स्वास्थ्य संगठनों सहित कई क्षेत्रों ने नाराजगी जाहिर की है।
केंद्र सरकार के इस फैसले पर भारतीय स्वयंसेवी स्वास्थ्य संघ (वीएचएआई) ने कहा कि तंबाकू उत्पादों के सेवन के खिलाफ सचित्र चेतावनी को अधिक जगह में प्रकाशित करने पर केंद्र सरकार द्वारा लगाई गई रोक शर्मिदा करने वाली है।
वीएचएआई के मुख्य कार्यकारी आलोक मुखोपाध्याय ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, "इस निर्णय से हम शर्मिदा महसूस कर रहे हैं। यह चौंकाने वाला है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपना निर्णय वापस ले लिया है, क्योंकि इसका तंबाकू उद्योग से मिलने वाले राजस्व पर विपरीत प्रभाव पड़ता। मंत्रालय ने अशिक्षित एवं बच्चों पर पड़ने वाले इसके बुरे प्रभाव को अनदेखा किया है।"
उन्होंने आगे कहा, "कोई भी देश जो अपने नागरिकों के सामाजिक-आर्थिक विकास को लेकर गंभीर है, इस तरह का एकतरफा अतार्किक निर्णय लेगी।"
केंद्र सरकार के इस निर्णय ने संसद सदस्यों, चिकित्सकों, कैंसर मरीजों, अंतर्राष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय विशेषज्ञों को यह पूछने पर विवश कर दिया है कि आखिर "भारत सरकार किस दिशा में जा रही है?"
भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य फाउंडेशन में स्वास्थ्य प्रसार की निदेशक मोनिका अरोड़ा ने भी इसी तरह के विचार व्यक्त किए।
अरोड़ा ने कहा, "एक बार फिर तंबाकू कंपनियां अधिक जगह पर सचित्र चेतावनी प्रकाशित करने को प्रयास को हल्का करने और उसे लागू करने में विलंब कराने के लिए आधारहीन तर्क गढ़ने में सफल रहीं।"
इससे पहले स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि अधिनस्थ विधान संबंधी समिति ने सरकार के उस निर्णय को एक अप्रैल से लागू करने को टालने की सिफारिश की, जिसमें तंबाकू उत्पादों के पैकेट पर अधिक जगह पर सचित्र चेतावनी प्रकाशित करने के लिए कहा गया है।
मंत्री ने कहा कि सचित्र चेतावनी को बढ़ाने पर कुछ समय के लिए रोक लगाई गई है, क्योंकि इस संबंध में सभी साझेदारों से विचार-विमर्श किया जाना बाकी है।
नड्डा ने कहा, "हम इस पर सभी संबद्ध साझेदारों से विचार-विमर्श करना चाहते हैं। उसके बाद ही इस विषय में कोई निर्णय लिया जाएगा।"