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BLOG : जिन्‍ना एक सोच है ….और खतरा वही है

इतिहासकारों के मुताबिक जिन्ना का रहन-सहन अपने आप में सवालों से घिरा था। वे न तो नमाज़ पढ़ते थे, न उन्हें क़ुरान की आयतें याद थी। इस्लामिक देशों में शायद ऐसे व्यक्ति को देश निकाला दे दिया जाता। लेकिन हम एक तस्वीर को भी निकाल नही पा रहे। क्यों ? 

Written by: Sucharita Kukreti
Published : May 10, 2018 08:23 pm IST, Updated : May 10, 2018 08:23 pm IST
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देश का विभाजन करने वाले मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर आज भी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में मौजूद है। ये बड़ी बात तो है पर उससे बड़ी बात उस डर का एहसास है कि आज भी देश के भीतर वही विभाजनकारी सोच सांसें ले रही हैं जिसने 70 साल पहले इसके दो टुकड़े कर दिए ? जिन्ना का इतिहास ही विभाजन का रहा है। 1930 में मुस्लिम लीग की सालाना बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिन्ना ने विस्तार से समझाया था कि हिन्दू मुसलमान कैसे दो अलग देश हैं? कैसे उनका खाना-पीना, रीति-रिवाज, संस्कृति, यहां तक कि उनका इतिहास भी सिर्फ अलग ही नहीं, एक दूसरे के विरोध में भी खड़ा है। ये कभी एक हो ही नही सकते। जिन्ना का भाषण सिर्फ एक व्यक्ति की सोच नहीं था। ये पाकिस्तान के सृजन का बीज था ।

आज जो लोग ये कहते हैं कि जिन्ना हमारे हीरो नही हैं पर हम उनकी तस्वीर नहीं हटने देंगे। जिन्ना हमारे आदर्श नहीं लेकिन कोई उनकी तस्वीर हटा कर दिखाए? ऐसे लोग उस तस्वीर की नहीं, बल्कि उस बीज की पहरेदारी कर रहे हैं जो सिर्फ बंटवारे की पौध को जन्म देता है। ये बंटवारा हमेशा ज़मीन का ही नही होता। ये मन का बंटवारा है। प्रेम का बंटवारा है। इंसानियत की सोच का बंटवारा है।

जो व्यक्ति आपका हीरो नहीं। जो आदर्श नहीं। जिसकी सोच को सलाम नहीं। फिर उसकी तस्वीर के नाम पर कर्फ्यू ,लाठीचार्ज और हिंसा क्यों बर्दाश्त कर रहे हो? उसे दोनो हाथों से उठाकर बाहर करो ।

इतिहासकारों के मुताबिक जिन्ना का रहन-सहन अपने आप में सवालों से घिरा था। वे न तो नमाज़ पढ़ते थे, न उन्हें क़ुरान की आयतें याद थी। इस्लामिक देशों में शायद ऐसे व्यक्ति को देश निकाला दे दिया जाता। लेकिन हम एक तस्वीर को भी निकाल नही पा रहे। क्यों ?  क्योंकि जिन्ना ने इस्लाम के लिए एक अलग मुल्क बनवा दिया? वो कर दिया जो दूसरा कोई भी नहीं कर पाया। क्या ऐसा कर के वो इस्लाम के हीरो बन गए ? वो साम्प्रदायिक नहीं धार्मिक हो गए? उनके सौ खून, हज़ार खून, लाख खून माफ हो गए ?

सवाल ये भी है कि अगर जिन्ना ऐसे लोगों के नायक हैं तो फिर देश की एकता के लिए जी जान की बाज़ी लगाने वाले मौलाना अबुल कलाम आजाद कौन हैं? फिर उत्तर पश्चिमी सीमांत प्रान्त में रहकर बंटवारे का पुरज़ोर विरोध करने वाले खान अब्दुल गफ़्फ़ार खान कौन हैं? फिर अखंड देश का संविधान रचने की ख्वाहिश रखने वाले डॉ. आंबेडकर कौन हैं?

बीच का रास्ता नहीं होता। जिन्ना देश के बंटवारे के ज़िम्मेदार हैं। जिसने देश के अस्तित्व का अपमान किया, उसके अस्तित्व का मान क्यों ?

(ब्‍लॉग लेखिका सुचरिता कुकरेती देश के नंबर वन चैनल इंडिया टीवी में न्‍यूज एंकर हैं) 

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