देहरादून: उत्तराखंड में गर्मी के चलते जंगलों में भीषण आग लग गई, जिसमें झुलसकर अब तक छह लोगों की मौत हो चुकी है औऱ पूरे उत्तराखंड में करीब 1890.92 हेक्टेअर से ज्यादा का जंगल तबाह हो चुके हैं, और आग पर काबू पाने औऱ आग को फैलने के रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन बल की तीन टुकडि़यों एवं विशेषज्ञ दल को तुरंत प्रदेश में तैनात करने के निर्देश दिए हैं।
एनडीआरएफ की टुकड़ियां, विशेषज्ञ दल आग से प्रभावित इलाकों में होंगे तैनात
मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि एनडीआरएफ की ये टुकड़ियां और विशेषज्ञ दल गढ़वाल एवं कुमाऊं के ऐसे क्षेत्रों में तैनात की जायेंगी जो जंगल में लगी आग से सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं। ये टुकड़ियां और दल प्रभावित क्षेत्र में प्रभावी रूप से तत्काल बचाव कार्य संचालित करेंगे। उन्होंने बताया कि इसके लिये पुलिस महानिरीक्षक संजय गुंज्याल नोडल अफसर के रूप में एन.डी.आर.एफ. एवं संबंधित जिलाधिकारी व मुख्य वन संरक्षक गढ़वाल-कुमाऊं से समन्वय स्थापित करने का कार्य करेंगे।
फरवरी के महीने में शुरू हुई थी जंगल में आग लगने की घटनाएं
प्रमुख वन संरक्षक रिसर्च और जंगल में आग के लिये नोडल अफसर बीपी गुप्ता ने भाषा को बताया था कि फरवरी में वनों में आग लगने की शुरूआत होने के बाद से प्रदेश में इस साल अब तक कुल 922 घटनायें हो चुकी हैं और तब तक इनमें एक मां-बेटा सहित पांच व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी थी और सात अन्य घायल हो गये। जंगलों में आग लगने की इन घटनाओं में अब तक 1890.92 हेक्टेअर जंगल तबाह हो चुका है।
जंगल में आग लगने की सूचना डीएम या फोरेस्ट अफसर को दें
सिंह ने कहा कि आगामी सात दिनों के लिए संभावित फायर प्वाइंटस एवं वन क्षेत्र की स्थिति व नाम वन विभाग की वेबसाइट पर वन मुख्यालय में स्थापित सूचना प्रौद्योगिकी एवं जियोइन्फोर्मेटिक्स केन्द्र द्वारा प्रतिदिन अपलोड की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में जिलेवार जंगलों में लगी आग की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों की सूची तथा आगामी 15 दिनों के लिए मौसम के पूर्वानुमान की सभी सूचनायें वन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि जंगल में आग लगने की घटनाओं की सूचना प्रसारण एवं रोकथाम हेतु व्हाट्सऐप एवं आपात कालीन सेवा-108 के नंबर पहले से ही संचालित हैं, जंगलों में आग की घटनाओं को पता चलने पर कोई भी व्यक्ति संबंधित जिले के जिलाधिकारी या प्रभागीय वनाधिकारी को सूचना दे सकता है।