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ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान इराक में फंसा भारतीय नाविक इंडिया पहुंचा, 17 घंटों की सड़क यात्रा की, फिर मिली फ्लाइट

 Reported By: Rajesh Kumar Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Apr 08, 2026 06:02 pm IST,  Updated : Apr 08, 2026 06:04 pm IST

भारतीय नाविक रेक्स परेरा जब भारत पहुंचे तो उन्होंने अपनी आपबीती सुनाई कि कैसे वह जहाज पर फंसे हुए थे और कैसे वहां से निकलकर भारत पहुंचे।

Indian sailor- India TV Hindi
भारतीय नाविक रेक्स परेरा Image Source : REPORTER INPUT

मुंबई: ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान इराक में फंसे भारतीय नाविक रेक्स परेरा 17 घंटे सड़क मार्ग से यात्रा करके भारत पहुंचे और फिर उन्हें उड़ान मिली। दरअसल ईरान-अमेरिका युद्ध के दौरान इराक के बसरा के अबू अल कसेब इलाके (ईरान-इराक बॉर्डर) में चार भारतीय नाविक फंसे हुए थे। जिसमें से एक रेक्स परेरा अब भारत पहुंच गए हैं।

रेक्स ने क्या बताया?

रेक्स ने भारत आने के लिए 17 घंटों तक रोड से ट्रैवल किया और फिर 24 घंटों तक एयरपोर्ट पर इंतजार किया, जिसके बाद करीबन साढ़े चार घंटे तक फ्लाइट से सफर करके भारत पहुंचे। रेक्स के मुताबिक इराक में मौजूद भारतीय दूतावास के प्रयासों की वजह से वो वापस भारत पहुंच पाए हैं।

रेक्स ने बताया कि वे पिछले एक महीने से जहाज पर फंसे थे और हालात लगातार खराब होते जा रही थी। रेक्‍स के मुताबिक, वे युद्ध शुरू होने से पहले ही वहां मौजूद थे, युद्ध की वजह से इराक का एयरस्पेस बंद हो गया था जिसके कारण उन्हें भारत लौटना संभव नहीं हो पा रहा है। सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि शिपओनर ने उनके पासपोर्ट और जरूरी दस्तावेज अपने पास रख लिए थे और एक महीने से वापस नहीं किए जिससे उनकी वापसी की प्रक्रिया अटकी हुई थी। 

उन्होंने बताया कि उनके जहाज पर कुल 4 भारतीय थे, जिनमें दो उत्तर प्रदेश, एक महाराष्ट्र के भायंदर और एक पश्चिम बंगाल का रहने वाला है। सभी के बीच डर का माहौल था। उन्होंने आगे बताया कि सुरक्षा के लिए वे शिफ्ट में सोते थे, दो लोग सोते थे और दो जागते रहते थे, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत एक-दूसरे को सतर्क किया जा सके। रेक्स ने कहा कि विस्फोट इतने तेज होते हैं कि जहाज हिल जाता था और ऐसा महसूस होता है जैसे भूकंप आ गया हो।

रेक्स के पिता ने क्या बताया?

रेक्स के पिता जस्टिन ने बताया कि वो लगातार रेक्स को कॉल करके यह कह रहे थे कि वो किसी भी तरह से घर लौट आये। जस्टिन ने आगे कहा मैंने वॉरशिप बिल्डिंग का काम किया है और मैंने देखा है किस तरह से यह दुनिया चलती है पर यहां इस तरह के माहौल में रहना हर किसी के बस की नही है। हम रेक्स से लगातार बात करते थे और उनकी आवाज सुनकर ही सुकून मिलता था।

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