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सुप्रीम कोर्ट में IPAC रेड मामले पर जोरदार बहस; ममता बनर्जी, DGP और कमिश्नर को नोटिस जारी

Reported By : Atul Bhatia Edited By : Vineet Kumar Singh Published : Jan 15, 2026 01:58 pm IST, Updated : Jan 15, 2026 02:52 pm IST

सुप्रीम कोर्ट में IPAC रेड मामले पर ED और ममता सरकार के बीच तीखी बहस हुई। ED ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया। वहीं बंगाल सरकार ने आरोपों को गलत बताया।

IPAC raid case, Supreme Court IPAC hearing- India TV Hindi
Image Source : PTI पश्चिम बंगाल में IPAC पर हुई ED की रेड का केस सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है।

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में  IPAC पर हुई रेड के मामले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को जोरदार बहस हुई। ED का दावा है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य पुलिस ने IPAC पर हुई रेड के दौरान जांच में बाधा डाली। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट में कहा कि यह बहुत ही चौंकाने वाली घटना है। मुख्यमंत्री खुद छापे वाली जगह पहुंच गईं और जांच में रुकावट डाली। राज्य पुलिस ने राजनीतिक तरीके से काम किया। मेहता ने आगे कहा कि ईडी पीएमएलए (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) की धारा 17 के तहत कार्रवाई कर रही थी, लेकिन इसे जानबूझकर प्रभावित किया गया। कोर्ट ने बहस के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सूबे के डीजीपी और कमिश्नर को नोटिस जारी कर 2 हफ्ते में जवाब मांगा है।

'अगर ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त किया गया तो...'

मेहता ने जोर देकर कहा कि अगर ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त किया गया तो इससे ऐसे कृत्यों को बढ़ावा मिलेगा और केंद्रीय बलों का मनोबल टूटेगा। राज्य सरकार को यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि वे जबरन घुसकर चोरी करें और फिर धरने पर बैठ जाएं। एक मिसाल कायम की जानी चाहिए और जो अधिकारी मौके पर थे, उन्हें निलंबित किया जाना चाहिए। जस्टिस मिश्रा ने पूछा कि क्या हम इन अधिकारियों को सस्पेंड कर दें? इस पर मेहता ने कहा कि कोर्ट खुद सस्पेंड न करे, लेकिन सक्षम अधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश दे। कोर्ट इस पूरे मामले को गंभीरता से ले। उन्होंने पीएमएलए की धारा 54 का जिक्र किया, जिसके तहत जांच में दखल देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है।

'TMC कार्यकर्ताओं ने कोर्ट को जंतर मंतर में बदला'

सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई से पहले टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने कोर्ट को जंतर मंतर में बदल दिया था। उन्होंने कहा, 'यह हंगामा अचानक नहीं हुआ था, बल्कि टीएमसी की लीगल सेल ने इसे प्लान किया था। उन्होंने मैसेज भेजकर लोगों को आने के लिए कहा था।' कोर्ट ने टिप्पणी की कि क्या कोर्ट को जंतर मंतर में बदल दिया गया? मेहता ने हां में जवाब दिया। ईडी का आरोप है कि उनके वकील एएसजी को हाईकोर्ट में ठीक से बहस नहीं करने दी गई और उनका माइक बार-बार म्यूट किया गया। मेंटेनबिलिटी पर मेहता ने कहा कि ईडी के अधिकारियों ने भारत के नागरिक के तौर पर याचिका दाखिल की, जो इससे प्रभावित हुए। इससे पहले सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर के घर का घेराव और तोड़फोड़ हुई थी।

'DCP के साथ ममता बनर्जी गैरकानूनी तरीके से घुसीं'

मेहता ने कहा, 'ईडी ने एक निजी कंपनी और उससे जुड़े व्यक्ति के घर छापा मारा, लेकिन वहां डीजीपी, कमिश्नर और डीसीपी के साथ ममता बनर्जी गैरकानूनी तरीके से घुसीं, दस्तावेज लेकर चली गईं, ईडी अधिकारियों के फोन ले लिए। हम मांग करते हैं कि राज्य अधिकारियों को लगे कि वे नेताओं के साथ धरना नहीं दे सकते। इससे केंद्रीय एजेंसियों का नैतिक बल प्रभावित होता है और जांच बाधित होती है। हम कोर्ट से चाहते हैं कि एमएचए और डीओपीटी को इन अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दे।' मेहता ने टीएमसी के वॉट्सऐप ग्रुप पर चल रहे मैसेज को कोर्ट में पढ़ा, जो कोर्ट की कार्रवाई में बाधा डालने को लेकर था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है और हम राज्य सरकार को नोटिस जारी कर रहे हैं।

सिब्बल और बनर्जी ने रखा बंगाल सरकार का पक्ष

मेहता ने कहा कि ऐसा क्या छिपाने जैसा था कि मुख्यमंत्री को पुलिस कमिश्नर के साथ जबरदस्ती अंदर घुसना पड़ा? मुख्यमंत्री परिसर में घुसीं और कानून-व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए सभी डिजिटल डिवाइस और तीन आपत्तिजनक दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए और दोपहर 12:15 बजे चली गईं। पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और कल्याण बनर्जी पेश हुए। सिब्बल ने कहा कि यहां जानकारी की कलरिंग की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम बहुत व्यथित हैं कि हाईकोर्ट को सुनवाई नहीं करने दी गई। सिब्बल ने कहा कि कल सुनवाई हुई है। कोर्ट ने कहा नहीं, पहले दिन। सिब्बल ने कहा कि सही जानकारी नहीं दी गई। ऐसा दोबारा नहीं होगा।

'प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनावी जानकारी थी'

सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सभी उपकरण जब्त करने का आरोप झूठा है। उन्होंने कहा, 'यह पूर्वाग्रह पैदा करने के लिए है। 12:05 तक कोई जब्ती नहीं हुई। प्रतीक जैन के लैपटॉप में चुनावी जानकारी थी। उन्होंने लैपटॉप और आईफोन लिया। बस इतना। कोई बाधा नहीं। ईडी के हस्ताक्षर हैं। याचिका में कही बातें पंचनामा के विपरीत हैं। IPAC के पास पार्टी सामग्री थी, इसलिए ईडी गई। अधिक सामग्री एकत्र करने का दुर्भावनापूर्ण कृत्य है।' सिब्बल ने कहा कि मुख्यमंत्री पर आरोप गलत है कि वे सारे डिवाइस ले गईं। उन्होंने कहा, 'ममता केवल अपना लैपटॉप और आईफोन ले गईं।'

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