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इस बाहुबली रॉकेट से लॉन्च होगा इसरो का आदित्य L1 मिशन, जानें क्या होगी पूरी प्रोसेस

 Reported By: T Raghavan, Edited By: Subhash Kumar
 Published : Sep 01, 2023 11:20 pm IST,  Updated : Sep 01, 2023 11:20 pm IST

कुल 128 दिन की यात्रा के बाद आदित्य L1 उपग्रह L1 प्वाइंट पर स्थापित होगा। इस मिशन में विकास इंजन का प्रयोग किया गया है जो पूरी तरह भारत में बना है।

aditya L1 mission- India TV Hindi
आदित्य L1 मिशन। Image Source : ISRO

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सूर्य का अध्ययन करने के लिए आदित्य L1 मिशन के लॉन्चिंग की तैयारी पूरी कर ली है। इस मिशन को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से 2 सितंबर सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर लॉन्च किया जाएगा। इस लॉन्चिंग में किस रॉकेट का उपयोग होगा? क्या होगी मिशन को लॉन्च करने से लेकर इसकी आखिरी स्टेज? आइए जानते हैं। 

इस रॉकेट से होगी लॉन्चिंग

इसरो के आदित्य L1 मिशन को PSLV रॉकेट की मदद से लॉन्च किया जाएगा।  PSLV रॉकेट का ये 59वां लॉन्च है। इस रॉकेट को इसरो का पॉवर हॉर्स भी कहा जाता है क्योंकि इसकी सक्सेस रेट तकरीबन 99 फीसदी है। ये रॉकेट शनिवार को 11 बजकर 50 मिनट पर आदित्य L1 मिशन लिफ्ट ऑफ करेगा। 

4 स्टेज में लॉन्चिंग
PSLV XL C 57 रॉकेट के कुल 4 स्टेज हैं। इसमें 6 स्ट्रैप ऑन बूस्टर्स लगते हैं। इसके 4 चरणों में से 2 चरणों में ठोस ईंधन और 2 चरणों में तरल ईंधन भरा जाता है। सबसे पहले 2 स्ट्रैप ऑन बूस्टर्स ऑन होंगे फिर हवा में जाने के बाद 4 स्ट्रैप ऑन बूस्टर्स ऑन होंगे। इसके बाद ये बूस्टर्स अलग होकर बंगाल की खाड़ी में गिर जाएंगे। इसके बाद सॉलिड ईंधन वाला प्रोप्लशन स्टेज 1 ऑन हो जाएगा वो रॉकेट को आगे लेकर जाएगा। इसके बाद वो अलग हो जाएगा फिर प्रोप्लशन स्टेज 2 ऑन हो जाएगा। इसके बाद पे लोड फेरिंग अलग होगी। ये एक ऊष्मा कवच होता है तो उपग्रह को धरती के वायुमंडल में होने वाले घर्षण से बचाता है।

ये होगी अगली स्टेज
स्टेज 2 अपना काम पूरा करने के बाद अलग हो जायेगा फिर प्रोपल्शन स्टेज 3 ऑन हो जाएगा। इसमें विकास इंजन लगा है जिसे पूरी तरह से हमारे वैज्ञानिकों ने तैयार किया है। ये इंजन आदित्य L1 को वांछित गति और ऊंचाई देने के बाद अलग हो जायेगा। इसके बाद PSLV रॉकेट का आखिरी फेज प्रोपल्शन स्टेज 4 ऑन हो जाएगा।
ये चरण सबसे लम्बा चलेगा, इस दौरान इंजन को 2 बार चालू किया जाएगा और 2 बार बंद किया जाएगा। ऐसा इसीलिए किया जा रहा है क्योंकि उपग्रह को एक बड़ी कक्षा में स्थापित किया जाना है।

ऐसे पहुंचेगा सूर्य के पास
लॉन्च के 63 मिनट के बाद आदित्य L1 सेटेलाइट 235 KM X 19500 KM की अति दीर्घ अंडाकार कक्षा में स्थापित किया जाएगा। इसके बाद अगले 16 दिनों में 5 अर्थ बाउंड मेनुवर्स किए जाएंगे और कम ईंधन खर्च करते हुए पृथ्वी के गुरूत्वाकर्षण बल की मदद से उपग्रह की कक्षा को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। इसके बाद जब आदित्य L1 पृथ्वी के स्पेहर ऑफ इनफ्लूएंस यानी गुरुत्वीय बल के दायरे से बाहर हो जाएगा तब ट्रांस लेगरान्ज 1 इनसर्शन किया जाएगा यानी उसे सूर्य की ओर L1 प्वाइंट के लिए मोड़ दिया जाएगा। यहां से 116 दिनों की यात्रा के बाद आदित्य L1 सेटेलाइट L1 पॉइंट पर पहुंच जाएगा। इस तरह कुल 128 दिन की यात्रा के बाद आदित्य L1 उपग्रह L1 प्वाइंट पर स्थापित हो जाएगा। 

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