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Kerala News: कुत्ते के काटने के बाद महिला की मौत, जांच में मौत की वजह रेबीज नहीं

 Published : Aug 23, 2022 06:08 pm IST,  Updated : Aug 23, 2022 11:51 pm IST

पेराम्ब्रा के रांडेयारू की 53 वर्षीय पी चंद्रिका के चेहरे पर 21 जुलाई को कुत्ते ने काट लिया था और 22 अगस्त उसकी मौत हो गई था। खबरों में कहा गया था कि वैक्सीन की चार खुराक लेने के बाद भी इस महिला की संदिग्ध रूप से रेबीज से मौत हो गई।

Vaccine- India TV Hindi
Vaccine Image Source : INDIA TV (REPRESENTATIONAL IMAGE)

Kerala News: हाल में कुत्ते के काटने के बाद मर गई एक महिला के ब्लड सैंपल के वैज्ञानिक परीक्षण (Scientific Test) से खुलासा हुआ है कि वह रेबीज से संक्रमित नहीं हुई थी। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को कहा कि उसकी मौत की वजह का पता लगाने के लिए यह जांच की गई थी। कोझिकोड चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल के सामुदायिक मेडिसीन विभाग के सूत्रों ने बताया कि रेबीज को लेकर किए गए टेस्ट का रिजल्ट ‘‘निगेटिव’’ रहा।

महिला की मौत की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि ये कोई पहला मामला नहीं है। पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं और अब टीके की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

वैक्सीन की 4 खुराक लेने के बाद भी महिला की मौत

पेराम्ब्रा के रांडेयारू की 53 वर्षीय पी चंद्रिका के चेहरे पर 21 जुलाई को कुत्ते ने काट लिया था और 22 अगस्त उसकी मौत हो गई था। खबरों में कहा गया था कि वैक्सीन की चार खुराक लेने के बाद भी इस महिला की संदिग्ध रूप से रेबीज से मौत हो गई। उसी क्षेत्र में इस कुत्ते ने सात अन्य को भी काटा था। चंद्रिका को स्वास्थ्य परेशानियां बढ़ने पर पिछले हफ्ते की शुरुआत में यहां सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गयाथा। शनिवार आधी रात को उसकी मृत्यु हो गई लेकिन महाविद्यालय प्रशासन ने कहा कि चंद्रिका को रेबीज हुआ था या नहीं- इसका पता उसके नमूनों की जांच होने के बाद ही चल पाएगा।

पलक्क्ड़ में गई थी 19 साल की लड़की की जान
बता दें कि इसी तरह की घटना जून में पल्लकड़ जिले भी हुई थी, जिससे रेबीज टीके के प्रभावी होने पर सवाल उठने लगे थे। पलक्कड़ में एक 19 साल की लड़की की कुत्ते ने काट लिया था। कुत्ते के काटने के उसने भी एंटी-रैबीज वैक्सीन का पूरी डोज ली थी, लेकिन इसके एक महीने बाद उसकी मौत हो गई थी। बता दें कि सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में लोगों को एंटी-रैबीज टीके मुफ्त में दिए जाते हैं। जबकि प्राइवोट अस्पतालों में निर्धारित खुराक को पूरा करने के लिए भारी भरकम शुल्क वसूला जाता है।

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