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कोलकाता रेप-मर्डर केसः छात्र नेता सायन लाहिड़ी को जमानत मिलने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची बंगाल सरकार

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Mangal Yadav
 Published : Aug 31, 2024 11:33 pm IST,  Updated : Aug 31, 2024 11:59 pm IST

याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए बंगाल सरकार को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि लहरी को जमानत दिए जाने का कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला सही नहीं है।

छात्रों के प्रदर्शन की फाइल फोटो- India TV Hindi
छात्रों के प्रदर्शन की फाइल फोटो Image Source : PTI

कोलकाताः पश्चिम बंगाल छात्र समाज के नेता सायन लाहिड़ी की कलकत्ता हाई कोर्ट से मिली जमानत के फैसले के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है।  सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई करेगी।

हाई कोर्ट ने छात्र नेता को दी थी जमानत

दरअसल कलकत्ता हाई कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंग छात्र समाज के नेता सायन लाहिड़ी को जमानत दे दी थी। सायन लाहिड़ी के बारे में दावा किया गया है कि वह 27 अगस्त को यहां आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला चिकित्सक के कथित रेप और हत्या के विरोध में राज्य सचिवालय तक आयोजित रैली के आयोजकों में से एक थे। पश्चिम बंगाल छात्र समाज उन दो संगठनों में से एक था, जिन्होंने 'नबान्न अभिजन' का आह्वान किया था।

सरकार ने याचिका में कही है ये बातें

लाहिड़ी को 27 अगस्त की शाम रैली का नेतृत्व करने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने बताया कि रैली में हिंसा हुई थी, जिसमें सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था। साथ ही पुलिस अधिकारियों पर हमले किए गए।  सायन लाहिरी की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दाखिल बंगाल सरकार की याचिका में कहा गया है कि शांतिपूर्ण आंदोलन की आड़ में लहरी ने हिंसक आंदोलन को बढ़ावा दिया। याचिका में लहरी के विरोध प्रदर्शन को अवैध बताया गया है।

सायन लाहिड़ी की जमानत का विरोध

 याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखने के लिए बंगाल सरकार को पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी याचिका में कहा है कि लहरी को जमानत दिए जाने का कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला सही नहीं है। बंगाल सरकार की याचिका में कहा गया है कि लहरी और अन्य लोगों के कारण राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हुई। बंगाल सरकार की याचिका में कहा गया है कि आरोपी को जमानत पर रिहा किए जाने से जांच प्रभावित हो सकती है।

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