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वक्फ विधेयक पर मौलाना अरशद मदनी बोले- यह स्वीकार नहीं, पारित हुआ तो सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती

Edited By: Avinash Rai @RaisahabUp61 Published : Feb 13, 2025 06:43 pm IST, Updated : Feb 13, 2025 06:43 pm IST

मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा ए हिंद के मुखिया मौलाना अरशद मदनी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा है कि वक्फ बिल स्वीकार नहीं है। अगर इसे पास किया जाता है तो इसे सुप्रीम कोर्ट में हम चुनौती देंगे। यह अलोकतांत्रिक है।

Maulana Arshad Madani said on Waqf Bill this is not acceptable if it is passed then we will challeng- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO वक्फ विधेयक पर मौलाना अरशद मदनी ने कही ये बात

प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को असंवैधानिक और अलोकतांत्रिक करार देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि मुस्लिम समुदाय इसे स्वीकार नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि संसद से इस विधेयक के पारित होने पर इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। मदनी ने यह बयान उस वक्त दिया जब बृहस्पतिवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक पर विचार करने वाली संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट को लोकसभा और राज्यसभा के पटल पर रखा गया। मुस्लिम संगठन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, मदनी ने कहा कि जो आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं, वे सही साबित हुईं। 

क्या बोले मौलान मदनी

उन्होंने कहा, "इन संशोधनों के जरिए केंद्र सरकार वक्फ संपत्तियों की स्थिति और प्रकृति को बदलना चाहती है, ताकि उन पर कब्जा करना आसान हो जाए और उनका मुस्लिम वक्फ का दर्जा खत्म हो जाए।’’ उनका कहना था, ‘‘पहले के कानून की धारा 3 में वक्फ बोर्ड यह तय करता था कि कोई वक्फ वैध है या नहीं, अब मौजूदा संशोधन में यह अधिकार कलेक्टर को दे दिया गया है, लेकिन अब मौजूदा 14 संशोधनों में जो आज संसद में पेश किए गए हैं, एक नए संशोधन ने कलेक्टर से लेकर उच्च पदस्थ सरकारी अधिकारी को जांच का अधिकार दिया है जो यह तय करेगा कि यह संपत्ति सरकारी है या वक्फ की जमीन है।’’ 

मदनी बोले- तानाशाही कानून को नहीं स्वीकार करेंगे

मौलाना मदनी ने कहा कि मुस्लिम समुदाय के विरोध के बाद वक्फ नियम में बदलाव किया गया। उन्होंने कहा, ‘‘हम इस तानाशाही कानून को स्वीकार नहीं कर सकते।’’ मदनी ने कहा कि ‘‘धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों’’ के पास अभी भी मौका है कि वे इस कानून को संसद में पारित होने से रोकें और इसका खुलकर विरोध करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘यदि यह कानून पारित हो जाता है तो जमीयत उलेमा-ए-हिंद इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी और साथ ही जमीयत उलेमा-ए-हिंद वक्फ संपत्तियों को बचाने के लिए मुसलमान और अन्य अल्पसंख्यकों और न्यायप्रिय लोगों के साथ मिलकर सभी लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का भी उपयोग करेगी।’’ 

(इनपुट-भाषा)

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