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ईरान युद्ध के बीच पीएम मोदी की अध्यक्षता में सीसीएस की बैठक, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा की समीक्षा

 Reported By: Devendra Parashar, Edited By: Niraj Kumar
 Published : Apr 01, 2026 09:26 pm IST,  Updated : Apr 02, 2026 12:08 am IST

पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (CCS) की एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

पीएम मोदी की अध्यक्षता में सीसीएस की बैठक- India TV Hindi
पीएम मोदी की अध्यक्षता में सीसीएस की बैठक Image Source : REPORTER INPUT

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई। करीब ढाई घंटे तक चली इस बैठक में पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर पैदा हुए हालात और उससे निपटने की तैयारियों पर चर्चा हुई है। 28 फरवरी को संघर्ष शुरू होने के बाद से प्रधानमंत्री द्वारा बुलाई गई CCS की यह दूसरी बैठक है।

पीएम मोदी ने इस मीटिंग के बाद सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट में इस बैठक से जुड़ी जानकारी शेयर की। उन्होंने लिखा- सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की बैठक की अध्यक्षता की। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के मद्देनज़र विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा उठाए जा रहे कदमों की समीक्षा की, और साथ ही आगे उठाए जाने वाले कदमों पर भी चर्चा की। ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, विमानन, जहाज़रानी और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों से जुड़े पहलुओं पर चर्चा की गई।

इन अहम बिंदुओं पर चर्चा

  1. कृषि, उर्वरक, शिपिंग, विमानन, लॉजिस्टिक्स और MSME क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए किए जाने वाले उपायों पर चर्चा की गई।
  2. आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए LPG और LNG की आपूर्ति में विविधता लाने, ईंधन शुल्क में कटौती करने और बिजली क्षेत्र से जुड़े उपायों की समीक्षा की गई।
  3. आवश्यक वस्तुओं की कीमतें स्थिर रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।
  4. कीमतों की लगातार निगरानी करने और 'आवश्यक वस्तु अधिनियम' के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समन्वय स्थापित करने के लिए नियंत्रण कक्ष (Control Rooms) स्थापित किए गए हैं।
  5. उर्वरकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं; इनमें यूरिया का उत्पादन बनाए रखना और DAP/NPKS की आपूर्ति के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करना शामिल है।
  6. प्रधानमंत्री ने आम नागरिकों के लिए अत्यंत आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का जायजा लिया।
  7. प्रधानमंत्री ने देश में उर्वरकों की उपलब्धता और खरीफ तथा रबी मौसमों के दौरान इनकी पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों पर चर्चा की।
  8. प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि इस संघर्ष (युद्ध) के दुष्प्रभावों से नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।
  9. प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि गलत सूचनाओं और अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए, जनता तक समय पर और सुचारू रूप से प्रामाणिक जानकारी पहुंचना अत्यंत आवश्यक है।

बैठक में ये नेता मौजूद रहे

केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, अमित शाह, एस. जयशंकर, निर्मला सीतारमण, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान, जे.पी. नड्डा, अश्विनी वैष्णव, मनोहर लाल खट्टर, प्रह्लाद जोशी, किंजरापु राममोहन नायडू और हरदीप सिंह पुरी उन लोगों में शामिल हैं जो इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा और शक्तिकांत दास, तथा कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन भी इस बैठक में मौजूद रहे।

पिछले रविवार को, अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में चल रहे "भयंकर युद्ध" से उत्पन्न स्थिति को चुनौतीपूर्ण बताया और नागरिकों से इन कठिनाइयों से निपटने के लिए एकजुट होने का आग्रह किया। उन्होंने इस संकट का राजनीतिकरण करने के प्रति आगाह करते हुए कहा कि ऐसी परिस्थितियों में स्वार्थ-पूर्ति वाली राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है।  उन्होंने अफवाहों से बचने की चेतावनी भी दी थी, जिससे देश को नुकसान हो सकता है।

सीसीएस की बैठक
Image Source : REPORTER INPUTसीसीएस की बैठक

ईरान युद्ध पर दूसरी CCS बैठक

22 मार्च को पीएम मोदी ने मंत्रियों और अधिकारियों के इसी समूह के साथ एक ऐसी ही बैठक की थी, जिसमें पश्चिम एशिया संघर्ष से जुड़ी बदलती स्थिति की समीक्षा की गई थी। इस बैठक में नागरिकों के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन शामिल था, जिसमें भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा प्रमुख थे। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष पूरी दुनिया को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित कर रहा है और नागरिकों को इसके प्रभावों से बचाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

प्रधानमंत्री ने सरकार के सभी अंगों को निर्देश दिया कि वे जनता को होने वाली असुविधा को कम करने के लिए आपस में समन्वय बनाकर काम करें। इससे पहले, 12 मार्च को उन्होंने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध ने एक वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है; उन्होंने इसे 'राष्ट्रीय चरित्र की परीक्षा' बताया, जिसका सामना शांति, धैर्य और अधिक जन-जागरूकता के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखलाओं में आने वाली रुकावटों से निपटने के लिए लगातार काम कर रही है।

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