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'हिंदू, सिख और बौद्ध के अलावा किसी धर्म में धर्मांतरण पर छिनेगा अनुसूचित जाति का दर्जा', SC का बड़ा फैसला

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Mar 24, 2026 11:32 am IST,  Updated : Mar 24, 2026 12:03 pm IST

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए फैसला दिया है कि अगर कोई व्यक्ति हिंदू, बौद्ध या सिख धर्म के अलावा कोई अन्य धर्म अपना लेता है और उसका पालन करता है, तो वह अनुसूचित जाति समुदाय का सदस्य नहीं रह जाता।

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सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति के दर्जे और धर्मपरिवर्तन से जुड़ा अहम फैसला दिया है। Image Source : PTI (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज (मंगलवार को) आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना लेता है और एक्टिव रूप से उसका पालन करता है, तो वह अनुसूचित जाति समुदाय का मेंबर नहीं रह सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध के अलावा किसी दूसरे धर्म का पालन करने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं मान सकते।

धर्म परिवर्तन पर अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत खत्म

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Constitution (Scheduled Caste) Order, 1950 में यह साफ किया गया है और इस आदेश के तहत प्रतिबंध पूर्णतः लागू होता है। 1950 के आदेश के खंड 3 में निर्दिष्ट न किए गए किसी भी धर्म में धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति वर्ग में जन्म के बावजूद, व्यक्ति का अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत खत्म हो जाता है। कोर्ट ने कहा कि संविधान या संसद या राज्य के विधानमंडल के अधिनियम के तहत कोई भी संरक्षण, आरक्षण, अधिकार या वैधानिक लाभ, उस व्यक्ति की तरफ से दावा नहीं किया जा सकता है और न ही उसे दिया जा सकता है, जिसे खंड 3 के मुताबिक अनुसूचित जाति का मेंबर नहीं माना जाता है।

ईसाई बनने वाले व्यक्ति ने दर्ज कराया था SC/ST एक्ट के तहत केस

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह प्रतिबंध पूर्णतः लागू है। इसमें किसी तरह का कोई अपवाद नहीं है। कोई भी व्यक्ति खंड 3 में शामिल धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को एक साथ स्वीकार और पालन नहीं कर सकता। और वह अनुसूचित जाति की सदस्यता का दावा नहीं कर सकता। जान लें कि यह आदेश एक ऐसे व्यक्ति के संदर्भ में पास किया गया था, जिसने ईसाई धर्म को अपना लिया था और एक पादरी के तौर पर कार्य करता था। इसके बावजूद उसने SC/ST एक्ट के तहत उन व्यक्तियों के खिलाफ केस दर्ज किया था, जिन्होंने कथित रूप से पर उसके ऊपर हमला किया था।

आरोपियों ने दी थी पादरी के मुकदमे को चुनौती

उसने SC/ST एक्ट के तहत संरक्षण का दावा किया था। लेकिन फिर आरोपियों ने इसे कानून के खिलाफ बताते हुए चुनौती दी, क्योंकि पादरी ने धर्म परिवर्तन कर लिया था और एक्टिव तरीके से ईसाई धर्म का पालन करता था।

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