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Tomato flu: कोरोना के बाद Tomato flu मचा रहा आंतक, छोटे बच्चे बन रहे इसका शिकार, जानिए लक्षण से बचाव तक सबकुछ

Tomato Flu: इस समय देश में तेजी से Tomato flu के मामले बढ़ रहे हैं। इसके चपेट में सबसे अधिक केरल, तमिलनाडु, हरियाणा और ओडिशा है। फ्लू के बढ़ते केस को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार 23 अगस्त को संक्रमण की रोकने के लिए एक गाइडलाइन जारी की।

Ravi Prashant Edited By: Ravi Prashant @iamraviprashant
Updated on: August 25, 2022 18:36 IST
Tomato flu- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV Tomato flu

Highlights

  • बीमारी के लिए कोई सटीक उपचार या टीका उपलब्ध नहीं है
  • यह वायरल हाथ, पैर और मुंह की बीमारी का एक नया रूप भी हो सकता है
  • ज्यादातर 1-5 वर्ष की आयु के बच्चे चपेट में आ रहे हैं

Tomato Flu: इस समय देश में तेजी से Tomato flu के मामले बढ़ रहे हैं। इसके चपेट में सबसे अधिक केरल, तमिलनाडु, हरियाणा और ओडिशा है। फ्लू के बढ़ते केस को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार 23 अगस्त को संक्रमण की रोकने के लिए एक गाइडलाइन जारी की। हाल ही में लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में एक पत्राचार प्रकाशित होने के बाद इस स्थिति की ओर ध्यान आकर्षित किया गया था, जो पहले केरल से रुक-रुक मामले आते आ रहे हैं। शोधकर्ताओं का मानना ​​​​है कि यह एंटरोवायरस (आंत के माध्यम से प्रसारित वायरस) के एक समूह के कारण हाथ-पैर और मुंह की बीमारी (एचएफएमडी) की एक अलग प्रकार मामले देखे गए। 

टोमैटो फ्लू क्या है?

टोमैटो फ्लू या टमाटर बुखार आप दोनों कह सकते हैं। इस रोग से जब आप ग्रसित हो जाते हैं तो आपके शरीर के जोड़ों में दर्द और लाल टमाटर जैसे चकत्ते शरीर पर होने लगते हैं। आमतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। इसके साथ ही साथ वायरल बुखार के लक्षण भी होते हैं जैसे दस्त, निर्जलीकरण, मतली, उल्टी, और थकान इत्यादि। इसे डेंगू और चिकनगुनिया के बाद के प्रभाव के रूप में माना जाता था जो आमतौर पर केरल में देखने को मिल जाता है। हालांकि, अब शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि यह कॉक्ससैकीवायरस ए-6 और ए-16 जैसे एंटरोवायरस के कारण होने वाला एचएफएमडी है।  एक रिपोर्ट में बताया कि ये "टोमैटो फ्लू एक वायरल संक्रमण के बजाय चिकनगुनिया या डेंगू बुखार के बाद हावी होता है। यह वायरल हाथ, पैर और मुंह की बीमारी का एक नया रूप भी हो सकता है, इस संक्रामक बीमारी से ज्यादातर 1-5 वर्ष की आयु के बच्चे चपेट में आ रहे हैं। इस संबंध में इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलरी साइंसेज में वायरोलॉजी की प्रोफेसर डॉ एकता गुप्ता ने बताया कि "एचएफएमडी कोई नया संक्रमण नहीं है, हमने इसके बारे में अध्यन किया है। देश भर में समय-समय पर इसकी सूचना दी जाती है, लेकिन यह आम नहीं है।”

टोमैटो फ्लू का संक्रमण अब क्यों फैल रहा है?
कोरोना वायरस के बाद हम सभी काफी सर्तक हो गए है इसलिए कोई भी नई बिमारी आ रही है तो हम जल्दी ही उसका उपाय खोजने में लग जा रहे हैं। इस समय संक्रमण पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है क्योंकि इस वर्ष अधिक मामले सामने आ रहे हैं। ऐसा इसलिए हो सकता है। चूंकि रोग स्वयं सीमित है, डॉक्टर आमतौर पर इसके लिए परीक्षण नहीं करते हैं। "बच्चों में बहुत सारे वायरल संक्रमण होते हैं,जिसका हम रोकथाम नहीं कर सकते हैं। हालांकि अब हम अधिक से अधिक वायरल संक्रमण देख रहे हैं क्योंकि पिछले पांच वर्षों में वायरल संक्रमणों के परीक्षण में वृद्धि हुई है और देश भर में वायरोलॉजी लैब स्थापित किए जा रहे हैं। डॉ गुप्ता ने कहा कि इस तरह की निगरानी समुदाय में प्रचलन में आने वाले वायरस पर नजर रखने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है लेकिन व्यक्तियों के लिए इसकी आवश्यकता नहीं है। "उदाहरण के लिए, लक्षणों को देखकर एचएफएमडी का आसानी से निदान किया जा सकता है।

क्या टोमैटो फ्लू का कोई इलाज है?
बीमारी के लिए कोई सटीक उपचार या टीका उपलब्ध नहीं है। संक्रमण से पीड़ित लोगों का उपचार लक्षणों के आधार पर किया जाता है, जैसे कि बुखार के लिए पेरासिटामोल का नुस्खा अपनाया जाता है। ये मुख्य रूप से बच्चों में हो रहा है। इस संबंध में केंद्र सरकार के तरफ से जो एडवाइजरी जारी किया गया है उसमें बताया गया है कि अगर किसी को भी संक्रमण होने का संदेह दिख रहा है तो उसे पांच से सात दिनों तक आइसोलेशन में रहना चाहिए। इसमें कहा गया है कि बच्चों को संक्रमण के बारे में जागरूक करना चाहिए किया। जिन बच्चों को बुखार या चकत्ते हो रहे हैं उन बच्चों को गले लगाने या छूने के लिए मना करना चाहिए। बच्चों को स्वच्छता के बार में बताए। अंगूठा या उंगली चूसना बंद करने और बहती नाक के लिए रूमाल का इस्तेमाल करने के लिए आदत पर जोर डालने की जरूरत है। यदि कोई बच्चा इस फ्लू के शिकार हो गए तो उन्हें अलग-थलग कर देना चाहिए, उनके बर्तन, कपड़े और बिस्तर को नियमित रूप से साफ करना चाहिए, उन्हें हाइड्रेटेड रखना चाहिए, और फफोले को गर्म पानी से साफ करना। इसमें यह भी कहा गया है कि प्रकोप होने पर उपाय करने के लिए परीक्षण किया जाना चाहिए। किसी भी श्वसन, मल, या मस्तिष्कमेरु द्रव के नमूने (एन्सेफलाइटिस या मस्तिष्क की सूजन के मामलों में) बीमारी के 48 घंटों के भीतर एकत्र किए जाने चाहिए। घावों या त्वचा के खुरचने के नमूनों की बायोप्सी में ऐसी समय सीमा नहीं होती है।

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