Nautapa 2026: नौतपा की शुरुआत साल 2026 में 25 मई से होने वाली है और 2 जून को इसकी समाप्ति होगी। आपको बता दें कि जब सूर्य ग्रह का गोचर रोहिणी नक्षत्र में होता है तो नौतपा की शुरुआत होती है। नौ दिनों तक सूर्य रोहिणी नक्षत्र में संचार करते हैं और धरती तपती है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर क्यों रोहिणी नक्षत्र में सूर्य के प्रवेश के बाद ही नौतपा की शुरुआत होती है और नौतपा के नौ दिनों का महत्व क्या है।
सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में जाने से क्यों होती है नौतपा की शुरुआत?
- ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्र हैं जिनमें से एक है रोहिणी नक्षत्र। सभी 27 नक्षत्रों में इसका स्थान चौथा है। रोहिणी नक्षत्र के स्वामी सौम्य ग्रह चंद्रमा हैं। वहीं यह नक्षत्र शीतलता और जल का कारक माना जाता है। वहीं सूर्य गर्म ग्रह हैं और शीतलता को अवशोषित करते हैं।
- यही वजह है कि जब शीतल नक्षत्र रोहिणी में सूर्य का प्रवेश होता है तो सूर्य पृथ्वी की शीतलता को भी सोख लेते हैं। रोहिणी में सूर्य के प्रवेश के साथ ही धरती के तापमान में वृद्धि हो जाती है क्योंकि इस दौरान जल तत्व की लगातार कमी होने लगती है। सूर्य रोहिणी नक्षत्र में 9 दिनों तक रहते हैं और इसलिए इन 9 दिनों को 'नौतपा' के नाम से जाना जाता है।
- सूर्य जब रोहिणी नक्षत्र में गोचर करते हैं तो इस दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी भी कम होती है और सूर्य की आग उगलती किरणें धरती पर पड़ती हैं। इस वजह से पृथ्वी का तापमान बढ़ने लगता है।
नौतपा का महत्व
नौतपा भले ही पृथ्वी के सबसे गर्म 9 दिन हों लेकिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इन दिनों का बड़ा महत्व है। इन नौ दिनों में दान-पुण्य करना, सूर्य आराधना करना, जल पिलाना आदि कार्य शुभ फलदायक माने जाते हैं। इसके साथ ही रोहिणी नक्षत्र के 4 अलग-अलग चरणों में सूर्य के प्रवेश का भी अलग महत्व ज्योतिष में बताया गया है।
- रोहिणी नक्षत्र के पहले चरण के स्वामी मंगल हैं इसलिए रोहिणी के पहले चरण में सूर्य के प्रवेश के साथ करियर और अपने लक्ष्यों के लिए लोग बेहद एकाग्र नजर आ सकते हैं। प्रबंधन और राजनीति के क्षेत्रों में सफलता भी व्यक्ति को मिलती है। सुख-सुविधाएं पाने की लालसा लोगों के मन में बढ़ सकती है।
- दूसरे चरण के स्वामी ग्रह शुक्र हैं जो प्रेम, भौतिकता आदि के कारक हैं। इसलिए रोहिणी के दूसरे चरण में सूर्य के प्रवेश के साथ ही भौतिक सुख पाने की इच्छा बढ़ती है। साथ ही रनचात्मक कार्यों में भी सफलता प्राप्त हो सकती है।
- रोहिणी के तीसरे चरण के स्वामी बुध हैं। ऐसे में विद्यार्थियों और कारोबारियों के लिए यह समय बेहद खास रहता है। तार्किक क्षमता बढ़ती है और शिक्षा क्षेत्र में विद्यार्थी उन्नति पाते हैं। साथ ही कारोबारियों को भी लाभ की प्राप्ति हो सकती है।
- रोहिणी नक्षत्र के चौथे चरण के स्वामी चंद्रमा हैं। सूर्य के चौथे चरण में प्रवेश के साथ ही कलात्मक कार्यों में सफलता मिल सकती है। पारिवारिक जीवन में बदलाव दिखने लगते हैं और साथ ही स्वास्थ्य में भी सुधार दिख सकता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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