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कौन हैं नंदन नीलेकणि? जिनकी अगुवाई में बनेगी हाई पावर टास्क फोर्स, परीक्षा व्यवस्था में होगा सुधार

 Written By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
 Published : Jul 26, 2026 07:54 pm IST,  Updated : Jul 26, 2026 08:32 pm IST

परीक्षा सिस्टम को पारदर्शी बनाने के लिए नंदन नीलेकणि की अगुवाई में टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। इसका ऐलान पीएम मोदी ने आज प्रसारित एक वीडियो संदेश में किया।

नंदन नीलेकणि- India TV Hindi
नंदन नीलेकणि Image Source : PTI

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीट पेपर लीक के बाद परीक्षा सुधारों पर बड़ा फैसला लेते हुए नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई पावर टास्क फोर्स गठित करने का ऐलान किया है। यह टास्क फोर्स परीक्षा व्यवस्था में सुधार लाने का काम करेगी। परीक्षा की पद्धति को भरोसेमंद, ट्रांसपैरेंट और एडवांस टेक्लोलॉजी युक्त बनाने का काम करेगी। 

परीक्षा सुधारों को लेकर पीएम ने किया अहम ऐलान

प्रधानमंत्री मोदी रविवार को एक बार फिर सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश प्रसारित किया और परीक्षा सुधारों को लेकर अहम ऐलान किया। पीएम मोदी ने कहा कि हम फास्ट ट्रैक कोर्ट बना चुके हैं। पार्लियामेंट के अंदर भी कठोर कानूनों के प्रावधान के साथ नया कानून बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लेकिन हमें भविष्य के लिए सोचना है। हमारी परीक्षा पद्धति विश्वस्त हो। हमारी परीक्षा पद्धति पारदर्शी हो। हमारी परीक्षा पद्धति में सबसे ज्यादा टेक्नोलॉजी का उपयोग हो। 

नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड टास्क फ़ोर्स 

परीक्षा में सुधार के लिए हाई-पावर्ड टास्क फ़ोर्स का गठन किया गया है। अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों का एक मल्टी-डिसिप्लिनरी ग्रुप NTA परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद करेगा। नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित इस टास्क फोर्स में कई विशेषज्ञों को जगह दी गई है।

  1. टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि
  2. ISRO के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ
  3. IB के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका
  4. IIT चेन्नई के डायरेक्टर वी. कामाकोटी
  5. पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल
  6. लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीणाृ

 कौन हैं नंदन नीलेकणि? 

नंदन निलेकणि टेक्नोलॉजी क्षेत्र के दिग्गज हैं। वे इंफोसिस के सह संस्थापक  हैं। उन्हें आधार कार्ड के जनक के तौर पर भी जाना जाता है। उनका पूरा नाम नंदन मोहनराव निलेकणि है। निलेकणि मूल रूप से कर्नाटक के रहनेवाले हैं। 2 जून 1955 को बेंगलुरु में उनका जन्म हुआ था। नंदन निलेकणि ने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी।

नंदन निलेकणि ने वर्ष 1981 में एन नारायण मूर्ति के साथ मिलकर इंफोसिस की स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी। यह कंपनी देश की बड़ी आईटी कंपनियों में शुमार हुई। नंदन निलेकणि वर्ष 2002 से 2007 तक इंफोसिस के सीईओ और एमडी रहे। बाद में वर्ष 2017 में इंफोसिस के चेयरमैन भी बने।

आधार के जनक

वर्ष 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उन्हें कैबिनेट रैंक देते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) का पहला अध्यक्ष बनाया। इस तरह से उन्हें दुनिया के सबसे बड़े बायोमेट्र्क पहचान सिस्टम को स्थापित करने की जिम्मेदारी मिली। आज यह पहचान प्रणाली (आधार कार्ड) देश के डिजिटल प्रशासन की एक मजबूत कड़ी है। इसी पहचान प्रणाली के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ डायरेक्ट लोगों तक पहुंचाना आसान हुआ। वेरिफिकेशन का काम सरल हुआ। यूपीआई के तकनीकी ढांचे को बढ़ावा देने में भी नंदन निलेकणि का अहम योगदान रहा।

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