लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रचंड जीत हासिल करने बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में विधानसभा का पहला सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। विधानसभा सत्र के दौरान जहां वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक पारित कराया जाएगा, वहीं विपक्षी दल कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर भी हल्ला बोलेंगे। (अरविंद केजरीवाल की पत्नी ने की कपिल मिश्रा की आलोचना कहा, खामियाजा भुगतना पड़ेगा)
विधानसभा का पहला सत्र होने की वजह से राज्यपाल राम नाईक दोनों सदनों को संयुक्त रूप से संबोधित करेंगे। सत्र के पहले दिन जीएसटी को सदन पटल पर रखा जाएगा और मंगलवार को इस पर चर्चा होगी। सरकार को एक जुलाई से जीएसटी लागू करना है। रविवार को विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। इस दौरान दीक्षित ने सभी दलों से सहयोग मांगा था।
विधानसभा सत्र के दौरान योगी सरकार की मुख्य चुनौती कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर बनी हुई है। योगी सरकार बनने के 50 दिनों के भीतर ही उप्र में कई जगह जातीय हिंसा हुई है। इसे लेकर कानून-व्यवस्था की स्थिति बदहाल होने का आरोप विपक्ष लगा रहा है। सहारनपुर हिंसा के अलावा पिछले 50 दिनों के भीतर कई बार ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई, जब भाजपा के विधायक और सांसद ही कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बने। गोरखपुर में भाजपा विधायक राधा मोहन दास द्वारा एएसपी चारू निगम को सार्वजनिक तौर पर फटकार लगाए जाने के मुद्दे पर भी विपक्षियों ने काफी हंगामा किया था।
इसके अलावा आगरा में कई हिंदूवादी संगठनों की वजह से कानून-व्यवस्था को लेकर समस्याएं खड़ी हुई हैं। इन सभी मुद्दों पर विपक्षी दलों ने सदन के भीतर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष राशिद मसूद का कहना है कि योगी सरकार के राज में माफिया राज कायम है। भाजपा के विधायक और सांसद ही कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बने हुए हैं।