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SIR: चुनाव आयोग ने फैक्ट चेक में पी. चिदंबरम के दावे को बताया भ्रामक, कहा-बिहार को तमिलनाडु से जोड़ना बेतुका

 Published : Aug 03, 2025 09:27 pm IST,  Updated : Aug 03, 2025 09:31 pm IST

चिदंबरम ने कहा, ‘‘एक ओर बिहार में 65 लाख मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने का खतरा है, तो दूसरी तरफ तमिलनाडु में 6.5 लाख लोगों को मतदाता के रूप में 'जोड़ने' की खबरें चिंताजनक व स्पष्ट रूप से अवैध हैं।’’

P. chidambaram- India TV Hindi
पी. चिदंबरम Image Source : PTI

नई दिल्ली:  चुनाव आयोग ने तमिलनाडु में 6. 5 लाख मतदाताओं के नाम जोड़ने के पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम के दावे को रविवार को गलत करार देते हुए खारिज कर दिया और कहा कि बिहार में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को तमिलनाडु से जोड़ना बेतुका है, जहां एसआईआर अभी तक शुरू नहीं किया गया है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि तमिलनाडु में प्रवासी मजदूरों को मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड किया जा रहा है, जो कि दक्षिणी राज्य की जनता द्वारा अपनी पसंद की सरकार चुनने के अधिकार में गंभीर हस्तक्षेप है। 

चिदंबरम ने क्या कहा था?

चिदंबरम ने कहा, ‘‘एक ओर बिहार में 65 लाख मतदाताओं के मताधिकार से वंचित होने का खतरा है, तो दूसरी तरफ तमिलनाडु में 6.5 लाख लोगों को मतदाता के रूप में 'जोड़ने' की खबरें चिंताजनक व स्पष्ट रूप से अवैध हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक भारतीय को किसी भी राज्य में रहने और काम करने का अधिकार है, जहां उसका एक स्थायी घर हो, चुनाव आयोग इस निष्कर्ष पर कैसे पहुंचा कि कई लाख लोगों को, जिनके नाम बिहार की वर्तमान मतदाता सूची में हैं, बाहर किया जाना चाहिए, क्योंकि वे राज्य से 'स्थायी रूप से पलायन' कर गए थे?’’ 

चिदंबरम ने कहा, ‘‘मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड होने के लिए किसी व्यक्ति के पास एक निश्चित और स्थायी कानूनी घर होना चाहिए। प्रवासी मजदूर का बिहार (या किसी अन्य राज्य) में ऐसा घर है। वह तमिलनाडु में मतदाता के रूप में कैसे पंजीकृत हो सकता है?’’ उन्होंने कहा कि अगर प्रवासी मजदूर के परिवार का बिहार में एक स्थायी घर है और बिहार में रहता है, तो प्रवासी मजदूर को तमिलनाडु में "स्थायी रूप से बसा हुआ" कैसे माना जा सकता है? चिदंबरम ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग "अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा है और राज्यों के चुनावी चरित्र और स्वरूप को बदलने की कोशिश कर रहा है।’’ 

चुनाव आयोग ने क्या जवाब दिया?

चुनाव आयोग ने ‘एक्स’ पर एक फैक्ट फाइंडिंग पोस्ट में कहा कि ऐसे बयान भ्रामक और निराधार हैं। उसने कहा कि अनुच्छेद 19(1)(ई) के अनुसार, सभी नागरिकों को भारत के क्षेत्र के किसी भी हिस्से में निवास करने और बसने का अधिकार है। आयोग ने कहा कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 19(बी) के अनुसार, प्रत्येक व्यक्ति जो किसी निर्वाचन क्षेत्र का सामान्य निवासी है, उस निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में रजिस्टर्ड होने का हकदार है। आयोग ने कहा कि यह मतदाताओं पर है कि वे आगे आएं और उस निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्टर्ड हों जिसके लिए वे पात्र हैं। आयोग ने स्पष्ट किया, ‘‘इसलिए, मूल रूप से तमिलनाडु से संबंधित, लेकिन सामान्यतः दिल्ली में रहने वाला व्यक्ति, दिल्ली में मतदाता के रूप में रजिस्टर्ड होने का हकदार है। इसी प्रकार, मूल रूप से बिहार से संबंधित, लेकिन सामान्यतः चेन्नई में रहने वाला व्यक्ति, चेन्नई में मतदाता के रूप में पंजीकृत होने का हकदार है।’’ 

चुनाव आयोग ने कहा कि राजनीतिक नेताओं को निर्वाचन आयोग द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर की जा रही एसआईआर प्रक्रिया के संबंध में "गलत जानकारी फैलाने" की "कोई आवश्यकता" नहीं है। आयोग ने कहा, ‘‘चुनाव के संज्ञान में आया है कि इस प्रक्रिया में बाधा डालने के उद्देश्य से मीडिया में जानबूझकर ऐसी जानकारी फैलाई जा रही है। जहां तक बिहार से स्थायी रूप से दूसरे राज्यों में स्थानांतरित हो चुके और उन राज्यों में सामान्य रूप से रहने वाले मतदाताओं का सवाल है, तो सटीक आंकड़े एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पता चल पाएंगे।’’ उसने कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के साथ संविधान में मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन की परिकल्पना उस निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार की गई है जहां वे सामान्य रूप से निवासी हैं। आयोग ने कहा कि मतदाताओं को आगे आकर उस निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्ट्रेशन कराना चाहिए जहां वे पात्र हैं। आयोग ने कहा, ‘‘हालांकि, यह देखा गया है कि तमिलनाडु में 6.5 लाख मतदाताओं के रजिस्ट्रेशन के बारे में कुछ झूठे आंकड़े फैलाए जा रहे हैं। तमिलनाडु में एसआईआर अभी तक शुरू नहीं की गई है। इसलिए बिहार में एसआईआर प्रक्रिया को तमिलनाडु से जोड़ना बेतुका है।’ (इनपुट-भाषा)

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