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मानसून सत्र में नहीं आएगा 'वन नेशन वन इलेक्शन बिल', सरकार का फोकस महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर

 Reported By: Devendra Parashar Written By: Shakti Singh
 Published : Jul 17, 2026 11:48 pm IST,  Updated : Jul 17, 2026 11:48 pm IST

वन नेशन वन इलेक्शन बिल का प्रभाव 2029 लोकसभा चुनाव में होगा और इसमें तीन साल का समय है। ऐसे में सरकार का पूरा फोकस महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर है।

Monsoon session- India TV Hindi
सरकार मानसून सत्र में महिला आरक्षण बिल पर फोकस करेगी Image Source : PTI

सोमवार से शुरु हो रहे संसद के मॉनसून सत्र में वन नेशन, वन इलेक्शन बिल नहीं आएगा। सूत्रों के अनुसार सरकार का मानना है कि वन नेशन, वन इलेक्शन बिल के लिए अभी टाइम है, क्योंकि इसका टारगेट 2029 का चुनाव है और उसमें 3 साल का वक्त है। फिलहाल सरकार का फोकस महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर है। डिलिमिटेशन बिल इस सत्र में आएगा या नहीं। इस बारे में अगले एक-दो दिन में स्थिति साफ हो सकती है।

संसद के मॉनसून सेशन को लेकर शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की मीटिंग हुई। इस मीटिंग में राजनाथ सिंह के अलावा अमित शाह, शिवराज सिंह चौहान, किरण रिजिजू, जेडीयू नेता ललन सिंह, टीडीपी नेता राम मोहन नायडू और आरएलडी से जयंत चौधरी शामिल हुए। सरकार का मानना है कि महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर विपक्षी पार्टियों में से भी कई दल बिल के पक्ष में रहेंगे और कांग्रेस अलग-थलग पड़ जाएगी।

विपक्षी पार्टियां भी बना रहीं रणनीति

इस बीच विपक्षी पार्टियां भी मॉनसून सेशन के लिए अपनी रणनीति बना रहे हैं। डीएमके प्रेसीडेंट एमके स्टालिन इन दिनों लंदन में हैं। वहीं से उन्होंने पार्टी के नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। स्टालिन से चर्चा करने के बाद डीएमके के नेताओं ने कहा कि अगर डिलिमेटेशन बिल अपने मौजूदा प्रारूप में ही आता है तो वो इसका विरोध करेंगे। सरवनन अन्नादुरई कह रहे थे कि डिलिमिटेशन बिल तमिलनाडु के हितों के खिलाफ है। अगर बिल को उसके मौजूदा प्रारूप में पास करवाया गया तो इससे दक्षिण भारतीय राज्यों की सीटें कम हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाई है। देखना होगा कि सरकार इसमें कोई बदलाव करती है या नहीं, लेकिन अगर बिल से तमिलनाडु को नुकसान हुआ तो डीएमके इसका विरोध करेगी।

दक्षिण भारतीय पार्टियां कर रहीं विरोध

परिसीमन बिल का सबसे ज्यादा विरोध साउथ की पार्टियां ही कर रही हैं। दक्षिण भारत के पांच राज्यों से आने वाले नेताओं को लग रहा है कि इससे उन्हें नुकसान होगा। तमिलनाडु की शिवगंगा सीट से कांग्रेस सांसद कार्ती चिदंबरम ने भी कहा कि परिसीमन बिल से नॉर्थ और साउथ के बीच गैप बढ़ जाएगा। उन्होंने एक और समस्या का जिक्र किया। कार्ति चिदंबरम ने कहा कि अभी लोकसभा में 543 सांसद हैं फिर भी बहुत कम लोगों को बोलने का मौका मिलता है। अगर साढ़े आठ सौ सीटें हो जाएंगी, तो फिर ज्यादातर सांसद मूक दर्शक बनकर रह जाएंगे।

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