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सॉफ्ट हिन्दुत्व के सहारे मिशन 2022 फतह करने की फिराक में जुटी कांग्रेस

 Reported By: IANS
 Published : Feb 11, 2021 02:01 pm IST,  Updated : Feb 11, 2021 02:01 pm IST

उत्तर प्रदेश में करीब तीन दशक से सत्ता से विमुख कांग्रेस अब हिन्दुओं के बीच में जगह बनाने के प्रयास में लग गई है। उसे लगता है कि सॉफ्ट हिन्दुत्व के सहारे 2022 का रण जीतना आसान होगा। इसीलिए वह अब इस कार्य में तेजी से लग गई है।

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सॉफ्ट हिन्दुत्व के सहारे मिशन 2022 फतह करने की फिराक में जुटी कांग्रेस Image Source : PTI

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में करीब तीन दशक से सत्ता से विमुख कांग्रेस अब हिन्दुओं के बीच में जगह बनाने के प्रयास में लग गई है। उसे लगता है कि सॉफ्ट हिन्दुत्व के सहारे 2022 का रण जीतना आसान होगा। इसीलिए वह अब इस कार्य में तेजी से लग गई है। बुधवार को किसान पंचायत में हिस्सा लेने सहारनपुर पहुंचीं कांग्रेस की यूपी प्रभारी प्रियंका वाड्रा को देखकर तो ऐसा ही लगा कि पार्टी हिन्दुत्व के लिए भी एक सॉफ्ट कोना तैयार कर रही है। सहारनपुर पहुंचीं प्रियंका के हाथों में रुद्राक्ष की माला और मंदिरों के दर्शन-पूजन यही संकेत दे रहे थे।

किसान पंचायत से पहले प्रियंका गांधी ने बाबा भूरा देव के दर्शन किए। इसके बाद शाकंभरी देवी मंदिर पहुंचीं। यहां पूजा अर्चना की और करीब 25 मिनट तक फर्श पर ध्यान में बैठी रहीं। इस दौरान भी उनके गले में रूद्राक्ष की माला देखी गई। शाकंभरी देवी मंदिर से प्रियंका खानकाह भी पहुंचीं।

उत्तर प्रदेश में लगातार ठोकरें खाती जा रही कांग्रेस अब सधे कदमों के साथ आगे बढ़ना चाहती है। उसी क्रम में गुरुवार को अचानक प्रियंका का कार्यक्रम प्रयागराज का बना है। मौनी अमावस्या के पर्व पर संगम में आस्था की डुबकी लगाएंगी। प्रियंका गांधी ने डीएम प्रयागराज को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी है। प्रियंका गांधी बगैर वीआईपी प्रोटोकॉल सामान्य स्नानार्थी की तरह संगम में गंगा स्नान करेंगी।

वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक रतनमणि लाल कहते है कि अब राजनीतिक दलों के मुस्लिम वोट बैंक नहीं रह गयी है। इसके पहले मुस्लिम वोट बैंक की तरह प्रयोग होता है। भाजपा ने इस राह को खत्म कर दिया है। मुस्लिम समाज भी एक पार्टी के ऊपर विश्वास नहीं करता है। धीरे-धीरे वह पार्टी से अलग होकर अपना वोट देता है। ऐसे में मुस्लिम समाज को अपनी ओर आकर्षित करना लाभप्रद नहीं लग रहा है। इसीलिए पार्टियां बहुसंख्यक हिन्दू समाज में अपना कोना तलाश रही हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव भी मंदिर-मंदिर जा रहे हैं। वह अयोध्या को मॉडल सिटी बनाने की बात कर रहे हैं। कृष्ण और परशुराम पूजा करना शुरू कर दिया है।

उन्होंने कहा बसपा प्रमुख मायावती ने भी मुस्लिम लीडरशिप से किनारा कर लिया है। अब कांग्रेस ने स्पष्ट रूप से हिन्दू समाज के साथ जोड़ने का कार्यक्रम शुरू किया है। जो कि इस बात को दर्शाता है कि भाजपा को काउंटर करने के लिए हिन्दूवाद ज्यादा मुफीद होगा। कांग्रेस को लगता है कि अगर हमने मुस्लिम समाज से जोड़ा तो फिर एक बार हिन्दू भाजपा की ओर लामबंद हो जाएंगे। इससे अच्छा हिन्दुत्व को लेकर चलना ठीक है। जो हिन्दू भाजपा को किसी कारण पसंद नहीं करते हैं तो वह इन पार्टियों का रूख कर सकते हैं।

कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय कहते हैं हिन्दुत्व किसी पार्टी की जागीर तो नहीं है। कांग्रेस पार्टी महात्मा गांधी वाले राम की भक्त है। हम राम के नाम को बेचते नहीं है। हम लोग भगवान के नाम को बेचते नहीं है। कांग्रेस ने हमेशा पूजा-पाठ में विश्वास रखा है। इसीलिए राजीव गांधी ने मंदिर का ताला खुलवाया था। उन्होंने बताया कि 1975 में इंदिरा भी संगम पहुंची थी। 2001 में सोनिया गांधी संगम आई थी। उन्होंने संगम स्नान किया था। 18 मार्च 2019 को प्रिंयका गांधी संगम पहुंची थी। उन्होंने लेटे हनुमान जी के दर्शन किये थे। संगम में गंगाजल का आचमन किया था।

स्वाती हरि चैतन्य ब्रम्हचारी महाराज ने कहा कि गांधी नेहरू परिवार सनातनी धर्मी रहे हैं। नेहरू, इंदिरा जी कई बार संगम स्नान करने आए है। गांधी नेहरू परिवार शुरू से पूजा-पाठ करता चला आ रहा है। भावी पीढ़ी इस परिपाटी को और अच्छे से निभाएगी।

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