यूपीआई पर चार्ज के मामले में विपक्ष केंद्र सरकार पर हमलावर है, लेकिन जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को यूपीआई के माध्यम से लेनदेन पर शुल्क लगाने के मामले में केंद्र सरकार का समर्थन करते हुए कहा कि डिजिटल भुगतान अवसंरचना को बनाए रखना और चलाना सस्ता नहीं है, लेकिन साथ ही उन्होंने सरकार को खुदरा ग्राहकों के हितों की रक्षा करने की सलाह भी दी। अब्दुल्ला ने कहा, "यह शुल्क हर किसी पर नहीं लगाया जा रहा है। सबसे पहले, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगता है। इसके अलावा, आम ग्राहकों से तब तक कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा जब तक वे एक तय सीमा से ज्यादा का लेन-देन नहीं करते।"
उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यूपीआई अवसंरचना को बनाए रखने और उसे चलाने का काम सस्ता नहीं है; इस भुगतान प्रणाली को चलाने में काफी पैसा खर्च होता है। उन्होंने कहा, "असलियत यह भी है कि जब कोई चीज पूरी तरह मुफ्त मिलती है, तो हम अक्सर उसकी सही कीमत नहीं समझते। फिर भी, भारत सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों पर इस शुल्क का बोझ न पड़े। अगर कंपनियों से शुल्क ली भी जाती है, तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है, क्योंकि वैसे भी कंपनियां यूपीआई से काफी मुनाफा कमाती हैं।"
राहुल गांधी ने लगाया आरोप, सिंधिया ने दिया जवाब
राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सामने झुकने के बजाय सीधे खड़े होना चाहिए और इस फैसले को वापस लेना चाहिए। उनके इस बयान पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि राहुल गांधी को हर जगह अमेरिका का भूत नजर आता है और वे कभी राष्ट्र निर्माण की बात नहीं करते। सिंधिया ने बताया कि यह शुल्क केवल व्यापारियों पर लागू होगा, वह भी उन व्यापारियों पर जिनका महीने का यूपीआई लेन-देन एक लाख रुपये से अधिक है और ऐसे व्यापारी कुल संख्या का मात्र चार प्रतिशत हैं। बता दें कि यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच गया है।
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