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जम्मू-कश्मीर में नए क्रिमिनल लॉ कब लागू होंगे? गृह मंत्री अमित शाह ने तय की समय-सीमा

 Published : Feb 19, 2025 11:36 am IST,  Updated : Feb 19, 2025 11:36 am IST

एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए, शाह ने यह भी कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में कमी और केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा परिदृश्य में सुधार के साथ, पुलिस को अब अपने लोगों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

Jammu kashmir, Amit Shah- India TV Hindi
समीक्षा बैठक Image Source : PTI

नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन को अप्रैल तक केंद्र शासित प्रदेश में तीन नए आपराधिक कानूनों का पूर्ण कार्यान्वयन सुनिश्चित करना चाहिए। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा की उपस्थिति में जम्मू-कश्मीर में तीन नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन पर एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए, शाह ने यह भी कहा कि आतंकवादी गतिविधियों में कमी और केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा परिदृश्य में सुधार के साथ, पुलिस को अब अपने लोगों के अधिकारों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। 

एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि बैठक में चर्चा के दौरान गृह मंत्री ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से अप्रैल 2025 तक तीन नए आपराधिक कानूनों का पूर्ण कार्यान्वयन सुनिश्चित करने को कहा। शाह ने कहा कि नए कानूनों के पूर्ण कार्यान्वयन के लिए पुलिस कर्मियों और प्रशासन के रवैये में बदलाव होना और लोगों के बीच नए कानूनों के बारे में जागरूकता पैदा करना जरूरी है। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने क्रमशः औपनिवेशिक युग की भारतीय दंड संहिता, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और 1872 के भारतीय साक्ष्य अधिनियम का स्थान लिया। ये कानून पिछले साल एक जुलाई को प्रभावी हुए थे। 

गृह मंत्री ने कहा कि तीन नए आपराधिक कानूनों के तहत त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। शाह ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया’ (आरोपी की अदालत में अनुपस्थिति के बिना आपराधिक मुकदमा चलाना) के प्रावधान का उपयोग करने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने आरोप पत्र दाखिल करने की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए पुलिस अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर जोर दिया। बैठक में जम्मू-कश्मीर में पुलिस,कारागार, अदालत, अभियोजन और फोरेंसिक से संबंधित विभिन्न नए प्रावधानों के कार्यान्वयन और वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के प्रत्येक थाने को राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) का अधिकतम उपयोग किया जाना चाहिए। 

गृह मंत्री ने कहा कि नए कानूनों के प्रावधानों के बारे में जांच अधिकारियों का शत-प्रतिशत प्रशिक्षण जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और संगठित अपराध से संबंधित प्रावधानों पर निर्णय पुलिस अधीक्षक के स्तर पर गहन जांच के बाद ही लिया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी की आवश्यकता है कि नए कानूनों के तहत इन प्रावधानों का दुरुपयोग न हो। शाह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सरकार ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद नए आपराधिक कानूनों को लागू करने की दिशा में संतोषजनक काम किया है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में तीन नए कानूनों के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा क्रमशः मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के स्तर पर मासिक, पाक्षिक और साप्ताहिक आधार पर की जानी चाहिए। बैठक में केंद्र सरकार और यूटी प्रशासन के शीर्ष अधिकारी भी शामिल हुए। (भाषा)

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