लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने रविवार को कहा कि अगर कोई भारतीय जमीन पर आतंकवाद को बढ़ावा देता है तो उसके लिए ‘‘ऑपरेशन सिंदूर से भी अधिक गंभीर परिणाम होंगे।’’ सीमा पार के लक्ष्यों को दक्षतापूर्ण तरीके से तबाह करने के लिए भारतीय सेना की वीरता और साहस की प्रशंसा करते हुए बिरला ने कहा कि भारत न केवल अपनी रक्षा करेगा बल्कि आतंकवाद का सफाया करने के लिए नई नीतियों और कार्यक्रमों को भी लागू करेगा।
जमशेदपुर में ‘सिंहभूम चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ (एससीसीआई) के कौस्तुभ जयंती (75वीं सालगिरह) समारोह के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए बिरला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से दुनिया में कहीं भी आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक रूप से लड़ने का आह्वान किया है ताकि इस खतरे को खत्म किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सेना ने यह साबित कर दिया है कि अगर कोई देश हमारे क्षेत्र में आतंकवाद को बढ़ावा देता है, तो उसके परिणाम ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से भी अधिक गंभीर होंगे।’’
डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भर हुआ देश
‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भारतीय सेना की सफलता के लिए स्वदेशी रक्षा उद्योग की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि भारत पहले तकनीक, उद्यमिता और कौशल की कमी के कारण रक्षा उपकरण आयात करता था, लेकिन पिछले एक दशक में देश धीरे-धीरे न केवल आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि रक्षा उपकरणों के निर्यात में भी विश्व में अग्रणी बनने की कगार पर है। बिरला ने कहा, ‘‘मोदीजी ने घरेलू उद्योगों को नई दिशा दी है। उन्होंने आत्मनिर्भर बनने की आवश्यकता पर बल दिया है।’’ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि मौजूदा प्रतिस्पर्धी विश्व परिदृश्य के बावजूद भारत अवसरों की भूमि है। उन्होंने कहा कि देश में अपनी बौद्धिक क्षमता और नवीन विचारों, प्रौद्योगिकी और युवा एवं कुशल मानव संसाधनों के साथ दुनिया का नेतृत्व करने की पर्याप्त क्षमता है।
बड़े उद्योग भारत की तरफ देख रहे
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास क्षमता और युवा एवं कुशल मानव संसाधन हैं, जिसकी दुनिया में कमी है।‘‘ उन्होंने कहा, ‘‘जापान और रूस जैसे विकसित देश यह मानकर हमारे देश में आते हैं कि भारत के पास विशाल बौद्धिक ज्ञान और नवीन विचार हैं।’’ उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े उद्योग भारत की ओर देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार उचित सुधार लाने और उद्योग-अनुकूल नीतियों को लागू करने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘अगर हम तेजी से बदलते परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए उद्योग-अनुकूल नीतियों को बनाना जारी रखते हैं, तो देश का सामाजिक-आर्थिक विकास गति पकड़ेगा।’’ (इनपुट- पीटीआई)