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झारखंड की सभी सहिया बहनों के खातों में 8 मार्च को आएंगे 24-24 हजार रुपये, स्वास्थ्य मंत्री ने सदन में दी जानकारी

 Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
 Published : Feb 20, 2026 02:43 pm IST,  Updated : Feb 20, 2026 02:54 pm IST

झारखंड के ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाली सहिया बहनों के खाते में 8 मार्च को एकमुश्त 24-24 हजार रुपये सरकार भेजेगी। इसकी जानकारी की सरकार की ओर से विधानसभा में दी गई है।

सहिया बहनों की फाइल फोटो- India TV Hindi
सहिया बहनों की फाइल फोटो Image Source : PTI

रांचीः झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने सहिया बहनों के लिए बड़ा ऐलान किया है। विधानसभा में मंत्री इरफान अंसारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर यानी 8 मार्च को सभी सहिया बहनों के खाते में एकमुश्त 24-24 हजार रुपये दिए जाएंगे। ग्रामीण इलाकों के स्वास्थ्य क्षेत्र में सहिया बहनें प्रमुख रोल अदा करती हैं। प्रदेश में करीब 42 हजार सहिया बहनें कार्यरत हैं।

​सदन में चर्चा के दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि सहियाओं को उनके द्वारा किए जाने वाले कार्यों के आधार पर प्रोत्साहन राशि (Incentive) दी जाती है। उन्होंने बताया कि ​टीकाकरण, फाइलेरिया उन्मूलन और मलेरिया नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सहियाओं की भूमिका अहम होती है। 

सहिया बहनों को एकमुश्त मिलेगी सैलरी

दरअसल, झारखंड सरकार सहिया बहनों को हर महीने दो हजार रुपये सैलरी देती है। ये 42000 सहिया अपना वेतन बढ़ाने का लगातार मांग कर रही हैं । ऐसे में इन्हें महिला दिवस पर साल भर का वेतन एक साथ देने की बात कही गई है। यानी इन कार्यकर्ताओं को साल भर की सैलरी एक साथ 8 फरवरी को मिलने वाली है। 

कौन हैं सहिया बहनें, क्या है इनका काम

दरअसल आशा कार्यकर्ताओं को ही झारखंड में सहिया (SAHIYA) कहा जाता है। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत ग्रामीण इलाकों में सहिया बहनें कार्य कर रही हैं। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं, टीकाकरण और नल जल योजना जैसी सेवाओं को घर-घर तक पहुंचाने के लिए सहिया बहनों की मदद लेती है। इन वर्कर्स को स्मार्ट फोन और अन्य प्रोत्साहन राशि भी सरकार देती है।  

बता दें कि हाल ही में हेमंत सोरेन सरकार ने सहियाओं के मानदेय को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये (निश्चित भाग) करने का निर्णय लिया था। इसके अलावा, राज्य सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2026) से इसे और बढ़ाकर 5,500 करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि साहिया शुरू से मांग कर रही हैं कि उन्हें ​इंसेंटिव यानी काम के बदले पैसा के भरोसे न रखकर एक निश्चित वेतन दिया जाए और उन्हें राज्य कर्मचारी का दर्जा मिले।  

रिपोर्ट- मुकेश सिन्हा

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