1. Hindi News
  2. लाइफस्टाइल
  3. जीवन मंत्र
  4. दूसरों में दोष ढूंढने के चक्कर में मनुष्य खुद का करता है ऐसा नुकसान, चाह के भी नहीं कर सकता भरपाई

दूसरों में दोष ढूंढने के चक्कर में मनुष्य खुद का करता है ऐसा नुकसान, चाह के भी नहीं कर सकता भरपाई

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Mar 06, 2021 06:07 am IST,  Updated : Mar 06, 2021 06:07 am IST

खुशहाल जिंदगी के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। अगर आप भी अपनी जिंदगी में सुख और शांति चाहते हैं तो चाणक्य के इन सुविचारों को अपने जीवन में जरूर उतारिए।

Chanakya Niti-चाणक्य नीति- India TV Hindi
Chanakya Niti-चाणक्य नीति Image Source : INDIA TV

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये सुधार पर आधारित है।

'दूसरों में दोष ढूंढने में वक्त बर्बाद ना करें, खुद में सुधार की गुंजाइश खत्म हो जाती है।' आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य के इस कथन का अर्थ है कई मनुष्य ऐसे होते हैं जिन्हें दूसरों के अंदर दोष ढूंढने की ज्यादा इच्छा होती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस काम को करने में सबसे ज्यादा सुकून मिलता है। लेकिन वो इस बात को भूल जाते हैं कि ऐसा करने से उनमें सुधार की जो बची कुची गुंजाइश होती है वो भी खत्म हो जाती है। 

इन 3 बातों को जानने वाले मनुष्य पर कर सकते हैं आंख बंद करके भरोसा, कभी नहीं खाएंगे धोखा

असल जिंदगी में आपको कई स्वभाव वाले व्यक्ति मिल जाएंगे। इनमें से कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ दूसरों में कमियां निकालते हैं। उन्हें लगता है कि दुनिया में अगर कोई परफेक्ट है तो वो खुद हैं। वहीं बाकी लोगों में ढेर सारी कमियां हैं। वो अपनी इस गलतफहमी को इतना ज्यादा बढ़ा देते हैं कि इसके आगे उन्हें कुछ भी दिखाई नहीं देता। इसी गलतफहमी में वो ऐसा कुछ कर जाते हैं जो उन्हें नहीं करना चाहिए। इन्ही में से एक काम दूसरों में कमियों को ढूंढना है।

इस तरह के अपमान को झेल पाना है मुश्किल, बचकर निकलने में है भलाई

इस तरह के स्वभाव वाले व्यक्ति बस दूसरों में कमियां निकालते रहते हैं। कुछ लोग तो ऐसे होते हैं कि भले ही उनमें लाखों कमियां हों लेकिन अपनी कमी को छिपाकर दूसरों के दोषों को ढूंढने में माहिर हो जाते हैं। अगर आप भी कुछ ऐसा ही करते हैं तो ना करें। ऐसा व्यक्ति इस एक चीज में इतना खो जाता है कि उसकी प्रवृत्ति वैसे ही बन जाती है। इस तरह के व्यक्ति को कोई भी पसंद नहीं करता। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि दूसरों में दोष ढूंढने में वक्त बर्बाद ना करें, खुद में सुधार की गुंजाइश खत्म हो जाती है।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Religion से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें लाइफस्टाइल