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दीपावली के दिन महालक्ष्मी की पूजा करने के पीछे क्या है कारण, जानिए

 Written By: Shivani Singh @lastshivani
 Published : Nov 02, 2015 09:15 pm IST,  Updated : Nov 02, 2015 09:37 pm IST

नई दिल्ली: दीपावाली हिन्दू धर्म का मुख्य पर्व है। रोशनी का पर्व माना जाने वाली दीवाली कार्तिक अमावस्या के दिन होती है। इस साल दीवाली 11 नवंबर 2015 को है। इस दिन श्री गणेश और

india TVइस प्रकार ब्रह्माजी ने इन्द्र को आस्वस्त किया और उन्हें लेकर भगवान विष्णु के पास गए और उनसे समाधान मांगा तो वह बोले कि मैं स्वयं महालक्ष्मी के जाने से शक्तिहीन हो गया हूं जिसके कारण मै आप लोगों की कोई सहायता न कर सकता है। बार-बार देवताओं के आग्रह करने पर विष्णु बोले कि महालक्ष्मी राक्षसों के पास जानें से वह शक्तिशाली बन गए है जिसके कारण वह ऐसे तो मानेगे नही।

इसलिए हमें ऐसा कोई काम करना होगा। जिसमें हमारी सहायता राक्षस भी करें। इसके बाद वह बोले कि हम समुद्र मंथन करके अमृत की प्राप्ति करते है । जिसको पी कर हम लोक अमर हो जाएगें और राक्षसों को आसानी से हरा सकते है। सभी को यह युक्ति अच्छी लगी।

तब देवताओं ने राक्षसों को अमृत का लालच देते हुए अपना एक दूत इंद्र ने पाताललोक में दैत्यराज बलि के पास भेजा। दूत की बात सुनकर राश्रसों को लगा कि यह महालक्ष्मी को पानें की साजिश की जा रही है, लेकिन अमृत के लालच के आगे उन्होनें हां कह दिया। इसके बाद जब देवताओं तथा असुरों ने समुद्र मंथन आरंभ किया, तब भगवान विष्णु ने कच्छप बनकर मंथन में भाग लिया। वे समुद्र के बीचोबीच में वे स्थिर रहे और उनके ऊपर रखा गया मदरांचल पर्वत। फिर वासुकी नाग को रस्सी बानाकर एक ओर से देवता और दूसरी ओर से दैत्यों ने समुद्र का मंथन करना शुरू कर दिया।

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अगली स्लाइड में पढ़े कि समुद्र मंथन में क्या निकला और क्यों की जाती है साथ में गणेश और सरस्वती की पूजा

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