Tuesday, February 24, 2026
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ईडी ने भोपाल में की बड़ी कार्रवाई, आरटीओ कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा समेत तीन गिरफ्तार, आय से अधिक संपत्ति का है मामला

Edited By: Avinash Rai @RaisahabUp61 Published : Feb 11, 2025 04:04 pm IST, Updated : Feb 11, 2025 04:04 pm IST

प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने भोपाल में बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल ईडी की टीम ने आय से अधिक संपत्ति मामले में सौरभ शर्मा समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

ED arrested three including RTO constable Saurabh Sharma case of disproportionate assets- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO ईडी ने भोपाल में की बड़ी कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने भोपाल में बड़ी कार्रवाई की है। दरअसल ईडी ने आरटीओ कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय के भोपाल जोनल कार्यालय ने सौरभ शर्मा, शरद जायसवाल और चेतन सिंह गौड़ को 10 फरवरी को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई सौरभ शर्मा और अन्य के खिलाफ दर्ज मामले में की गई है। ईडी ने यह जांच मध्य प्रदेश लोकायुक्त, विशेष पुलिस स्थापना भोपाल द्वार दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर के मुताबिक, परिवहन विभाग, भोपाल में सेवानिवृत कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा ने अपने परिवार के सदस्यों और संबंधित कंपनियों के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति अर्जित की थी। 

ईडी की टीम ने की गिरफ्तारी

बता दें कि इस मामले में बीते दिनों आयकर विभाग की टीम ने भोपाल में छापेमारी की थी। इस दौरान चेतन सिंह गौड़ की गाड़ी से 52 किलोग्राम सोने की बार और 11 करोड़ रुपये नकद जब्त किए थे। चेतन सिंह को सौरभ शर्मा का करीबी सहयोगी बताया जा रहा है। बता दें कि 27 दिसंबर 2024 और 17 जनवरी 2025 को ईडी ने सौरभ शर्मा, उनके परिवार और सहयोगियों के ठिकाने पर छापेमारी की थी। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, अचल संपत्तियों के कागजाद और कई कंपनियों में किए गए निवेश से जुड़े दस्तावेज ईडी ने जब्त किए थे।

क्या है पूरा मामला?

जांच में यह सामने आया कि सौरभ शर्मा ने अपने परिवार, मित्रों और कंपनियों के नाम पर लगभग 25 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति खरीदी थी। इसके अलावा, अबतक 10 करोड़ रुपये की चल संपत्ति को जब्त या फ्रीज किया जा चुका है। जांच में पता चला कि सौरभ शर्मा को 2015 में एमपी परिवहन विभाग में आरटीओ कॉनस्टेबल की नौकरी मिली थी। इसके बाद उन्होंने अपने सहयोगियों चेतन सिंह गौड़ और शरद जायसवाल के साथ मिलकर कई फर्जी कंपनियां बनाई और उनके बैंक खातों का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया। इस पैसे का उपयोग उन्होंने अपने परिवार, दोस्तों और कंपनियों के नाम पर संपत्ति खरीदने में किया। फिलहाल ईडी की जांच जारी है और इस मामले में और भी कई खुलासे होने की संभावना है।

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