मध्य प्रदेश में 15 महीने पुरानी कांग्रेस सरकार के गिरने की वजह पर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। कांग्रेस के दो दिग्गज नेता पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इस मामले में अलग-अलग दावे कर रहे हैं। इन दावों से राज्य की राजनीति में हलचल मच गई है और बीजेपी को भी कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।
साल 2018 में कांग्रेस ने 15 साल के लंबे इंतजार के बाद मध्य प्रदेश की सत्ता में वापसी की थी, लेकिन यह सरकार सिर्फ 15 महीने ही चल पाई। मार्च 2020 में कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 22 समर्थक विधायकों के साथ पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए थे। इस कदम से कमलनाथ सरकार गिर गई थी। उस वक्त यह खबर काफी चौंकाने वाली थी, क्योंकि सिंधिया को गांधी परिवार का करीबी माना जाता था। उस दौरान यह कयास लगाए गए थे कि सिंधिया मुख्यमंत्री, प्रदेश अध्यक्ष या राज्यसभा सीट नहीं मिलने से नाराज थे।
सरकार गिरने की वजह पर दिग्गजों की तकरार
हाल ही में, एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में दिग्विजय सिंह ने सरकार गिरने की एक नई वजह बताई। उन्होंने कहा कि उन्होंने और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मिलकर ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के लिए एक "विशलिस्ट" तैयार की थी, जिस पर दोनों के हस्ताक्षर भी थे। यह लिस्ट कमलनाथ को भेजी गई थी, लेकिन जब उस पर अमल नहीं हुआ तो सिंधिया नाराज हो गए और सरकार गिर गई।
दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद कमलनाथ ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। कमलनाथ ने X पर पोस्ट किया कि सिंधिया की नाराजगी की वजह यह थी कि उन्हें लगता था कि सरकार दिग्विजय सिंह चला रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने विधायकों को तोड़ा और सरकार गिराई।
इस खींचतान पर ज्योतिरादित्य सिंधिया, जो अब केंद्र सरकार में मंत्री हैं, ने कहा कि वह अतीत में नहीं जाना चाहते।
बीजेपी और पूर्व कांग्रेस नेताओं ने साधा निशाना
कांग्रेस के दोनों दिग्गजों की इस तकरार के बाद बीजेपी ने भी हमला बोलने का मौका नहीं गंवाया। मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने कांग्रेस को गुटों और गिरोहों में बंटी हुई पार्टी बताया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब जनता को यह जानने का हक है कि आखिर 15 महीने तक कांग्रेस की सरकार कौन चला रहा था, कमलनाथ या दिग्विजय सिंह?
इसके अलावा, सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए पूर्व कांग्रेसी नेताओं ने भी इस मामले में अपनी राय रखी। मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने खुद स्वीकार किया है कि उनसे गलती हुई थी। उन्होंने बताया कि सिंधिया ने किसानों का कर्ज माफ करने, बेरोजगारी और शिक्षकों की समस्याओं को हल करने जैसे मुद्दे उठाए थे, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया। मंत्री गोविंद राजपूत ने कहा कि दिग्विजय सिंह ने जो कहा है, सोच-समझकर ही कहा होगा।
इस बीच, मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दोनों नेताओं के बीच सुलह कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि कमलनाथ और दिग्विजय सिंह की दोस्ती 45 साल पुरानी है और दोनों की अपनी अलग केमिस्ट्री है। उन्होंने कहा कि पुरानी बातों में जाने का कोई मतलब नहीं है और पार्टी को आगे की सरकार बनाने पर काम करना चाहिए।
ये भी पढ़ें-
निक्की हत्याकांड में NCW ने अपनाया कड़ा रुख, कहा- "समाज को सोचना होगा, ऐसा कैसे कर सकता है?"