भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में कांग्रेस ने एक बड़ा दांव खेला है। अल्पसंख्यक महिलाओं को मुख्यधारा की राजनीति से जोड़ने के लिए पीसीसी मुख्यालय में प्रोजेक्ट 'M' की औपचारिक लॉन्चिंग की गई है। पिछले 7 महीनों की जमीनी रणनीति के बाद कांग्रेस ने अब सक्रिय महिलाओं की एक स्पेशल फोर्स तैयार की है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य सिर्फ मुस्लिम ही नहीं, बल्कि सिख, बौद्ध, जैन और पारसी समुदाय की महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें नेतृत्व के लिए प्रशिक्षित करना है।
लीडरशिप स्किल विकसित करने पर रहेगा जोर
एमपी कांग्रेस अब अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के कंधे पर जिम्मेदारी सौंपने जा रही है। प्रोजेक्ट M के जरिए कांग्रेस का मकसद महिलाओं में केवल राजनीतिक समझ पैदा करना ही नहीं, बल्कि उनमें लीडरशिप स्किल विकसित करना भी है। संगठन का मानना है कि प्रशिक्षण के माध्यम से ये महिलाएं न केवल पार्टी की विचारधारा को घर-घर पहुंचाएंगी, बल्कि चुनावी मैदान में भी मजबूती से उतरेंगी।
महिलाओं में राजनीतिक आत्मनिर्भर बनाने की पहल
शनिवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का आगाज किया। करीब तीन घंटे तक चले विशेष सत्रों में महिलाओं को राजनीतिक आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती के गुर सिखाए गए। जीतू पटवारी के मुताबिक, महिलाओं में राजनीतिक आत्मनिर्भरता कैसे आए, कैसे आर्थिक रूप से मजबूत हो, महिलाओं को जागृत करने से लेकर महिला नेतृत्व को आगे लाना और उन्हें राजनीतिक आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए प्रोजेक्ट एम यानी महिला लाया गया है।
कांग्रेस की पहल से मध्य प्रदेश में चढ़ा सियासी पारा
वहीं, कांग्रेस की इस पहल पर प्रदेश में सियासी पारा चढ़ गया है। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने इस पर तीखा तंज कसते हुए इसे जिन्ना की चाल करार दिया है। शर्मा के मुताबिक, अब कांग्रेस भी अल्पसंख्यक है, चाहे मुसलमान का ताबीज अपने गले में कांग्रेस डाले या कांग्रेस, मुसलमान के गले में ताबीज डालें। अब इससे भाजपा को कोई फर्क नहीं पड़ता जो थोड़ी बहुत कांग्रेस पहले बची थी आने वाले दो-5 सालों में वह भी खत्म हो जाएगी कांग्रेस जिन्ना की चाल चल रही है।
कितना असरदार होगा कांग्रेस का महिला कार्ड?
एमपी की राजनीति में महिला कार्ड हमेशा से असरदार रहा है, लेकिन कांग्रेस का यह प्रोजेक्ट M कितना सफल होगा और क्या यह भाजपा के मजबूत कैडर के सामने टिक पाएगा, यह तो आने वाले चुनाव ही बताएंगे। फिलहाल, कांग्रेस की इस नई फोर्स ने प्रदेश की सियासत में चर्चाएं जरूर तेज कर दी हैं।
अल्पसंख्यक महिलाएं में नेतृत्व क्षमता तो है सक्रिय भी है लेकिन चाहे NGO सिलाई सेंटर सेंटर हो लेकिन वह राजनीति में नहीं है, सक्रिय राजनीति में ताकि वह नेतृत्व हम उनके लिए ऐसा प्रोजेक्ट बना रहे हैं जहां वह सहजता सरलता से कभी राजनीति कर सकें, अल्पसंख्यक महिलाओं की भागीदारी सत्ता में सुनिश्चित कर सकें।
अल्पसंख्यक मतलब मुस्लिम, बौद्ध, पंजाबी, जैन और पारसी समुदाय, इनकी महिलाएं राजनीति में कम हैं। अल्पसंख्यक महिलाएं कांग्रेस की विचारधारा से प्रोजेक्ट एम के माध्यम से जुड़ें। प्रशिक्षण के माध्यम से उनके अंदर समझ पैदा करें।
बीजेपी मुसलमान को लेकर राजनीति करती है, टारगेट करती है। उन्होंने एम का मतलब निकाला मुस्लिम, जबकि एम का मतलब माइनॉरिटी होता है।