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पति के होते हुए किसी और से प्यार करना कब गुनाह? MP हाई कोर्ट ने खींच दी 'लक्ष्मण रेखा'

 Published : Feb 14, 2025 12:12 pm IST,  Updated : Feb 14, 2025 12:29 pm IST

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में कहा कि पति के अलावा किसी और के प्रति पत्नी का प्यार और स्नेह व्यभिचार नहीं माना जाता, जब तक कि इसमें शारीरिक संबंध शामिल न हों।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट - India TV Hindi
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट Image Source : INDIA TV

जबलपुर: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने माना है कि पत्नी का अपने पति के अलावा किसी और के प्रति प्रेम और स्नेह तब तक व्यभिचार नहीं माना जाएगा जब तक कि वह उस व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध में न हो। याचिका की सुनवाई करते हुए एमपी हाई कोर्ट के जस्टिस जीएस अहलूवालिया ने कहा कि "किसी पत्नी का अपने पति के अलावा किसी अन्य पुरुष के प्रति प्रेम और स्नेह तब तक व्यभिचार नहीं माना जाएगा जब तक कि वह उस व्यक्ति के साथ शारीरिक संबंध में न हो"।

हाई कोर्ट ने पति की दलील को किया खारिज

कोर्ट ने पति की इस दलील को खारिज कर दिया कि चूंकि उसकी पत्नी किसी और से प्रेम करती है, इसलिए वह भरण-पोषण पाने की हकदार नहीं है। पिता द्वारा संपत्ति से बेदखल करने और कम मासिक आय की नौकरी का हवाला देकर छिंदवाड़ा के रहने वाले पति ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। निचली अदालत के द्वारा गुजारा भत्ता देने के आदेश के खिलाफ पति ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में पति ने ससुराल छोड़कर मायके जाने और दूसरे पुरुष से बात किए जाने को आधार बनाकर कहा था कि उसकी पत्नी गुजारा भत्ता पाने की हकदार नहीं है। 

पति को अब देना होगा पत्नी को गुजारा भत्ता

हाई कोर्ट ने निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा जिसमें पत्नी को 4000 रुपए गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया गया था। हाई कोर्ट ने कहा कि पति को हर हाल में पत्नी को गुजारा भत्ता देना पड़ेगा। 

हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दी ये नसीहत

हाई कोर्ट ने पति की कम आय की दलील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पति की कम आय की दलील गुजारा भत्ता देने से इनकार करने का मापदण्ड नहीं है। यदि आवेदक ने यह जानते हुए भी कि वह अपनी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में भी सक्षम नहीं है, किसी लड़की से विवाह किया है तो इसके लिए वह स्वयं जिम्मेदार है, लेकिन यदि वह शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति है, तो उसे अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने या भरण-पोषण राशि का भुगतान करने के लिए कुछ कमाना होगा।

रिपोर्ट- देबजीत देब, जबलपुर

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