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'शिवराज ये तेरी परीक्षा की घड़ी है....', पूर्व सीएम ने बताया मोहन यादव को मुख्यमंत्री चुने जाने के वक्त का किस्सा, पढ़ें

 Reported By: Anurag Amitabh, Edited By: Subhash Kumar
 Published : Nov 17, 2025 02:43 pm IST,  Updated : Nov 17, 2025 03:03 pm IST

शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि 2023 में मध्य प्रदेश में सीएम को चुना जाना उनके लिए परीक्षा की घड़ी थी। शिवराज ने बताया है कि उनके दिल ने कहा कि शिवराज ये तेरी परीक्षा की घड़ी है। माथे पर शिकन मत आने देना।

Shivraj singh chouhan - India TV Hindi
शिवराज सिंह चौहान का छलका दर्द। (फाइल फोटो) Image Source : PTI

अखिल भारतीय किरार सम्मेलन के मंच पर रविवार को वह दर्द बाहर आ गया जिसे शिवराज सिंह चौहान अब तक दिल में दबाए बैठे थे। 2023 में मध्य प्रदेश में भाजपा की रिकॉर्ड तोड़ जीत के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने की कसक शिवराज की जुबान पर आ ही गई। शिवराज ने कहा कि साल 2023 में जब बंपर मेजोरिटी आई और तय हुआ कि सीएम मोहन यादव बनेंगे तो उनके माथे पर बल नही पड़ा।

क्या बोले शिवराज सिंह चौहान?

अखिल भारतीय किरार सम्मेलन के मंच पर शिवराज ने समाज के हजारों लोगों की मौजूदगी में शिवराज ने कहा- “परीक्षा की घड़ी आती है, कई बार जब बम्पर मेजोरिटी मिली। 2023 में हर किसी को लगता था कि स्वाभाविक रूप से तय है सब चीजें। लेकिन मैं समाज को प्रणाम करते हुए कहना चाहता हूं कि वो मेरी परीक्षा की घड़ी थी। तय हुआ कि मुख्यमंत्री मोहन जी होंगे। मेरे माथे पर बल नहीं पड़ा। अलग-अलग रिएक्शन हो सकते थे, गुस्सा आ सकता था। मैंने इतनी मेहनत की, पर दिल ने कहा कि शिवराज ये तेरी परीक्षा की घड़ी है माथे पर शिकन मत आने देना, आज तू कसौटी पर कसा जा रहा है। और मैंने नाम प्रस्तावित किया।"

भाजपा को चुनाव में 230 में से 163 सीटें मिलीं थी

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में साल 2023 की चुनावी जीत में शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। भाजपा को चुनाव में 230 में से 163 सीटें मिलीं और राजनीतिक हलकों में यह लगभग तय माना जा रहा था कि चौहान लगातार पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनेंगे। मगर बम्पर जीत के बाद केंद्रीय नेतृत्व ने सीएम के तौर पर डॉक्टर मोहन यादव के नाम पर मुहर लगा दी। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान केंद्र में कृषि मंत्री बने। 163 सीटों की ऐतिहासिक जीत के बावजूद मुख्यमंत्री पद न मिलना शिवराज सिंह चौहान के लिए बड़ी राजनीतिक चोट माना जाता है। यही दर्द किरार समाज के सम्मेलन में मंच पर उनकी बातों में साफ-साफ छलक उठा।

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