राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक केबी हेडगेवार के नागपुर स्थित स्मारक पर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नहीं जाने के बाद राजनीति गर्मा गई है। कांग्रेस ने इस पर निशाना साधा है। हेडगेवार के स्मारक पर अजित पवार के न जाने पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) की ओर से बयान भी सामने आया है।
विकास के लिए महायुति में शामिल हुई है NCP
एनसीपी ने कहा कि वह राज्य के विकास के लिए महायुति में शामिल हुई है। एनसीपी के प्रवक्ता आनंद परांजपे ने कहा कि पार्टी की विचारधारा छत्रपति शाहूजी महाराज, महात्मा ज्योतिराव फुले और बी आर आंबेडकर जैसे समाज सुधारकों की प्रगतिशील सोच पर आधारित है। उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है, जब अजित पवार ने केशव बलिराम हेडगेवार के स्मारक पर जाने से परहेज किया है।
फडणवीस और एकनाथ शिंदे भी पहुंचे
रविवार सुबह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे और सत्तारूढ़ भाजपा एवं शिवसेना के विधायकों ने हेडगेवार के स्मारक पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी, लेकिन अजित पवार और उनके नेतृत्व वाली एनसीपी के नेता इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।
नागपुर में विधानमंडल का शीतकालीन सत्र
इस समय नागपुर में महाराष्ट्र विधानमंडल का शीतकालीन सत्र जारी है। हर साल इस सत्र के दौरान भाजपा के मंत्री और विधायक रेशिमबाग में स्थित स्मृति मंदिर में आरएसएस के संस्थापक हेडगेवार और दूसरे सरसंघचालक एम.एस. गोलवलकर के स्मारक पर जाते हैं।
पिछले साल एनसीपी से ये नेता पहुंचे थे स्मारक पर
विधानसभा में 41 विधायकों वाली एनसीपी की ओर से पिछले साल केवल विधायक राजू करेमोरे और राजकुमार बडोले स्मृति मंदिर पहुंचे थे। एनसीपी प्रवक्ता परांजपे ने दोहराया कि यह पहली बार नहीं है, जब अजित पवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापक के स्मारक पर जाने से दूरी बनाई है। उन्होंने कहा, 'हम अपने सिद्धांतों पर कायम हैं और हमारा ध्यान राज्य के विकास पर है।'
कांग्रेस ने NCP पर साधा निशाना
विपक्षी दल कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने दावा किया कि एनसीपी मंत्रिमंडल बैठकों में आरएसएस की 'विचारधारा' सुन रही है और अगर पवार की पार्टी उससे सहमत नहीं होगी, वह सत्ता में नहीं रह सकती। सावंत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरएसएस की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि वह लोकतंत्र और संविधान को कमजोर करने वाली विचारधाराओं को बढ़ावा देता है। शिंदे और शिवसेना विधायकों के हेडगेवार स्मारक जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि उनका ध्यान 'पैसा बांटकर सत्ता हासिल करने और संवैधानिक लोकतंत्र को नष्ट करने' पर है। (इनपुट-PTI)