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फडणवीस सरकार का बड़ा फैसला, गणेशोत्सव को घोषित किया महाराष्ट्र का 'राज्य महोत्सव'

 Reported By: Dinesh Mourya Edited By: Mangal Yadav
 Published : Jul 10, 2025 03:33 pm IST,  Updated : Jul 10, 2025 04:56 pm IST

महाराष्ट्र भर में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाने वाला बहुचर्चित सार्वजनिक गणेशोत्सव अब आधिकारिक तौर पर राज्य उत्सव के रूप में मनाया जाएगा।

सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
सांकेतिक तस्वीर Image Source : ANI

बईः देवेंद्र फडणवीस की सरकार गणेशोत्सव त्योहार को महाराष्ट्र का राज्य महोत्सव घोषित किया है। इससे पहले सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने आज राज्य विधानसभा में बोलते हुए कहा था कि इस आशय की आधिकारिक घोषणा जल्द ही की जाएगी। यह आश्वासन विधायक हेमंत रसाने के अनुरोध पर दिया गया, जिन्होंने सत्र के दौरान यह मांग उठाई थी।

1893 से मनाया जा रहा है गणेशोत्सव

महाराष्ट्र में गणेशोत्सव की शुरुआत 1893 में हुई थी। लोकमान्य तिलक ने 1893 में गणेशोत्सव शुरुआत की थी और इसे राष्ट्रवाद, सामाजिक एकता, स्वाभिमान और अपनी भाषा व संस्कृति के प्रति प्रेम के मूल्यों से जोड़ा था। शेलार ने कहा कि यह उत्सव आज भी उन आदर्शों को कायम रखता है। उन्होंने कहा, "इस उत्सव में बाधा डालने के लिए अदालतों में कई याचिकाएं डाली गई थी। जिनमें पुलिस और अधिकारियों को उत्सव की अनुमति न देने का सुझाव दिया गया था।

मंत्री ने कहा कि महायुति सरकार ने ऐसी सभी बाधाओं को सफलतापूर्वक दूर कर दिया है। सांस्कृतिक भावना के इस पुनरुत्थान के कारण, अब यह उत्सव महाराष्ट्र के उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। शेलार ने ज़ोर देकर कहा कि सरकार राज्य की सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है, और गणेशोत्सव महाराष्ट्र की सामूहिक विरासत का प्रतीक है।

कब मनाया जाएगा गणेशोत्सव

बता दें कि इस साल गणेशोत्सव 26-27 अगस्त को मनाया जाएगा। 2025 में गणेश चतुर्थी उत्सव और इसके अनुष्ठान बुधवार, 27 अगस्त 2025 को मध्याह्न गणेश पूजा मुहूर्त के साथ शुरू होंगे, जो सुबह 11:06 बजे से दोपहर 01:40 बजे तक रहेगा। गणेश विसर्जन 2025 शनिवार, 6 सितंबर, 2025 को निर्धारित है। गणेश चतुर्थी, हिंदू धर्म में, समृद्धि और बुद्धि के देवता भगवान गणेश के जन्मोत्सव का 10 दिवसीय उत्सव है। यह हिंदू कैलेंडर के छठे महीने, भाद्रपद (अगस्त-सितंबर) के चौथे दिन (चतुर्थी) से शुरू होता है।

भगवान गणेश को 'विघ्नहर्ता' यानी विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है। यह त्यौहार जाति-धर्म की सीमाओं से परे है और भगवान गणेश की दिव्य उपस्थिति का जश्न मनाने के लिए जाति, पंथ या धर्म की परवाह किए बिना सभी वर्गों के लोगों को एक साथ लाता है।

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