बीड: महाराष्ट्र के बीड से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया। दरअसल परंपरा ये कहती है कि जब किसी इंसान की मौत हो जाती है तो उसकी राख को पानी में विसर्जित किया जाता है लेकिन IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने इस कर्मकांड को ठुकरा दिया और अपनी मां की अस्थियों को पानी में विसर्जित करने के बजाय पेड़ लगाया और अस्थियों को वहीं पर विसर्जित किया।
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आईएएस अधिकारी द्वारा उठाए गए इस कदम की हर तरफ चर्चा हो रही है। आईएएस अधिकारी ने ये भी ऐलान किया है कि मां के निधन के बाद दसवां, तेरहवीं और भोज जैसे किसी भी पारंपरिक कर्मकांड को नहीं किया जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
राज्यभर में हमेशा चर्चा में रहने वाले आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे की माता आसराबाई मुंढे का हालही में निधन हो गया था। उनके निधन के बाद परंपरा के अनुसार नदी में अस्थि विसर्जन करने के बजाय तुकाराम मुंढे और उनके भाई अशोक मुंढे ने घर के आंगन में एक बरगद का पेड़ लगाकर वहीं अस्थियों का विसर्जन किया। इसके साथ ही उन्होंने दसवां, तेरहवीं और भोज जैसे किसी भी पारंपरिक कर्मकांड को नहीं करने का ऐलान किया है। मुंढे द्वारा लिए गए इस फैसले की अब हर तरफ चर्चा हो रही है।
कौन हैं IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे?
तुकाराम मुंढे एक सीनियर आईएएस अधिकारी हैं और महाराष्ट्र में काफी चर्चा में रहे हैं। दरअसल हालही में आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे का उनके 21 साल के प्रशासनिक करियर में 24वीं बार तबादला हुआ था। इसके बाद सोशल मीडिया पर लोग उन्हें उन्हें महाराष्ट्र का 'अशोक खेमका' कहने लगे थे।
तुकाराम मुंढे के सख्त तेवरों की वजह से भ्रष्टाचारी उनसे थर-थर कांपते हैं। उन्होंने कई ऐसे काम किए हैं, जिसकी वजह से आम लोगों को काफी फायदा मिला है, यही वजह है कि उन्हें वाटरमैन भी कहा जाता है।
तुकाराम मुंढे का जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के एक गांव में हुआ। उनके पिता किसान थे लेकिन उन्होंने तुकाराम को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। बचपन में संघर्ष करते हुए तुकाराम ने अपनी शिक्षा पूरी की और एमए की डिग्री लेने के बाद यूपीएससी (UPSC) की तैयारी शुरू की। पहली बार में वह यूपीएससी नहीं निकाल पाए लेकिन 2005 में परीक्षा पास करके आईएएस बने। (रिपोर्ट- बीड से आमिर हुसैन)