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मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज, घायलों से मिलने जालना पहुंचे शरद पवार

 Reported By: Rajesh Kumar,  Sameer Bhaudas Bhise Edited By: Swayam Prakash
 Published : Sep 02, 2023 04:04 pm IST,  Updated : Sep 02, 2023 04:04 pm IST

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर 29 अगस्त से ही आंदोलनकारी अनशन पर बैठे थे। जिसके बाद पुलिस अनशनकारियों को उठाने पहुंची, इस दौरान विवाद बढ़ गया और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसके बाद यहां हिंसा भड़क गई। अब एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार घायलों से मिलने जालना पहुंच गए हैं।

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महाराष्ट्र के जालना में मराठा आरक्षण को लेकर भड़की हिंसा Image Source : ANI/PTI

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। जालना हिंसा पर सूबे में सियासी घमासान मच गया है। एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार घायलों से मिलने जालना पहुंच गए हैं। तो वहीं, उद्धव ठाकरे भी आज शाम तक जालना पहुंचेंगे और घायलों का हाल जानेंगे। आपको बता दें कि शुक्रवार को जालना में भारी हिंसा हुई थी। उपद्रवियों ने कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था। तो वहीं, पुलिस की लाठीचार्ज में कई आंदोलनकारी भी घायल हो गए हैं।

आंदोलनकारियों से क्या बोले शरद पवार?

अब इस सबके बीच शरद पवार भी जालना पहुंचे हैं और आंदोलनकरियों से मुलाकात की। इस दौरान शरद पवार ने कहा कि पुलिस का लाठीचार्ज करना गलत था। शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन करने का अधिकार सभी को है। पवार ने कहा कि छत्रपती शिवाजी महाराज के वंशज उदयन राजे भोसले भी हमारे साथ हैं। इस पर मैं समाधान व्यक्त करता हूं। वहीं शरद पवार के बाद उद्धव ठाकरे भी आज शाम को जालना जाएंगे। ठाकरे मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे लोगों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज में जख्मियों से मिलेंगे।

कहां से शुरू हुआ बवाल?
दरअसल, मराठा आरक्षण की मांग को लेकर 29 अगस्त से ही आंदोलनकारी अनशन पर बैठे थे। अनशनकारियों की तबियत बिगड़ रही थी, जिसके बाद पुलिस अनशनकारियों को उठाने पहुंची। इस दौरान ही विवाद बढ़ गया और पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा, जिसके बाद हिंसा भड़क गई। आंदोलनकारियों ने हाईवे को जाम कर दिया और कई गाड़ियों में आग लगा दी। साथ ही जमकर पथराव भी किया। इसमें कई पुलिसवाले घायल भी हो गए। लाठीचार्ज के विरोध में महाराष्ट्र के अहमदनगर बीड़ और दूसरे कई जिलों में बंद का असर देखने को मिल रहा है। 

महाराष्ट्र में लंबे वक्त से मराठा आरक्षण की मांग
बता दें कि महाराष्ट्र में काफी लंबे वक्त से मराठा आरक्षण की मांग उठ रही है। जिसके बाद साल 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी नौकरी और शिक्षा में 16 प्रतिशत आरक्षण देने का ऐलान किया था। लेकिन महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और जून 2019 में हाई कोर्ट ने इसे कम करते हुए शिक्षा में 12% और नौकरियों में 13% आरक्षण फिक्स कर दिया गया। लेकिन जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया तो देश की सबसे बड़ी अदालत ने ये मामला संवैधानिक बेंच को भेजा और फिर मराठा आरक्षण को रद्द कर दिया गया। महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी लगाई थी, लेकिन उसे भी सुप्रीम कोर्ट ने इस साल खारिज कर दिया। अब विवाद की वजह भी यही है कि मराठा समुदाय के लोग आरक्षण की मांग कर रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक उन्हें आरक्षण नहीं दिया जा सकता है, क्योंकि ये आरक्षण के 50 प्रतिशत की सीमा से अधिक है।   

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