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आखिर क्या खाकर गई थी तेंदुए और 3 बाघों की जान? जांच में पता चली ये बड़ी बात

 Reported By: Yogendra Tiwari Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jan 09, 2025 12:42 pm IST,  Updated : Jan 09, 2025 12:42 pm IST

महाराष्ट्र के नागपुर में गोरेवाडा रेस्क्यू सेंटर में 3 बाघों और एक तेंदुए की मौत बर्ड फ्लू से हुई। वन मंत्री गणेश नाइक ने कहा कि ये जानवर मुर्गी खाने के कारण बर्ड फ्लू की चपेट में आए और इनकी मौत हो गई।

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गोरेवाडा रेस्क्यू सेंटर में सैनिटाइजेशन करता कर्मचारी। Image Source : INDIA TV

मुंबई: महाराष्ट्र के नागपुर में एक पशु बचाव केंद्र में 3 बाघों और एक तेंदुए की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाइक ने कहा है कि नागपुर के गोरेवाडा रेस्क्यू सेंटर में 3 बाघों और एक तेंदुआ मुर्गी खाने की वजह से ही बर्ड फ्लू की चपेट में आ गए थे। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच से साफ है कि चारों मुर्गी खाने के बाद बर्ड फ्लू की चपेट में आए थे और उनकी मौत इसी वजह से हुई है।

‘जानवरों को खाने में फिलहाल मुर्गी नहीं दी जा रही’

वन मंत्री ने कहा कि जानवरों से यह बीमारी मनुष्यों में न फैल जाए इसलिए रेस्क्यू सेंटर को फिलहाल बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि नागपुर के गोरेवाडा रेस्क्यू सेंटर में 3 बाघों और तेंदुए को खाने के लिए मुर्गी दी गई थी और उसी से उन्हें बर्ड फ्लू हो गया। उन्होंने कहा कि साइंटिफिक रिपोर्ट अभी आई नहीं है। नाइक ने कहा कि महाराष्ट्र के चंद्रपुर में वन विभाग के अधिकारियों को बुलाया गया है। नाइक ने कहा कि अब रेस्क्यू सेंटर में जानवरों को खाने में मुर्गी नहीं दी जा रही है। बता दें कि जानवरों के नमूने जांच के लिए भोपाल पशु चिकित्सा प्रयोगशाला भेजे गए थे, जहां चारों की मौत बर्ड फ्लू के कारण होने की पुष्टि हुई थी।

‘चंद्रपुर से गोरेवाडा रेस्क्यू सेंटर लाए गए थे जानवर’

इससे पहले गोरेवाडा प्रोजेक्ट के प्रभागीय प्रबंधक शतानिक भागवत ने बताया था कि मानव-पशु संघर्ष की घटनाओं के बाद पशुओं को चंद्रपुर से गोरेवाडा रेस्क्यू सेंटर में ट्रांसफर किया गया था। उन्होंने कहा था कि दिसंबर के अंत में बचाव केंद्र में बाघों और तेंदुए की मौत हो गई। भागवत ने बताया कि बाघों को दिसंबर के दूसरे हफ्ते में बचाव केंद्र में लाया गया था, जबकि तेंदुए को मई से ही वहां रखा गया था। उन्होंने बताया कि पशुओं में अलग-अलग लक्षण दिखे, लेकिन दिसंबर के तीसरे हफ्ते में वे लंगड़ाने लगे और उन्हें बुखार आ गया और बाद में उनकी मौत हो गई।

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