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नागपुर में बोले मोहन भागवत, कहा- "संघ का पूरा कार्य स्वयंसेवकों के परिश्रम से खड़ा हुआ"

 Reported By: Yogendra Tiwari Edited By: Rituraj Tripathi
 Published : Apr 08, 2026 11:13 pm IST,  Updated : Apr 08, 2026 11:14 pm IST

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में संघ की शक्ति के बारे में बताते हुए कहा कि देश के दिशा दर्शन करने वाली शक्ति का रूप लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ खड़ा है।

Mohan Bhagwat- India TV Hindi
संघ प्रमुख मोहन भागवत Image Source : REPORTER INPUT

नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ नागपुर महानगर के घोष पथक के इतिहास को हस्तलिखित रूप में संकलित किया गया है। सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत की उपस्थिति में इस हस्तलिखित इतिहास का आज डॉ. हेडगेवार स्मृतिमंदिर परिसर में लोकार्पण किया गया।

यह हस्तलिखित इतिहास संघ के नागपुर महानगर घोष के इतिहास को एकत्रित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस हस्तलिखित में नागपुर महानगर घोष के कार्य की शुरुआत, विभिन्न गतिविधियों के साथ-साथ घोष वादन की परंपरा और पद्धतियों की विस्तार में जानकारी दी गई है। इस कार्यक्रम के दौरान नागपुर महानगर घोष वादकों द्वारा विभिन्न रचनाएं एवम प्रात्यक्षिक प्रस्तुत किए जाएंगे।

इस मौके पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में कहा, "कहानियों के दो प्रकार होते हैं, एक इतिहास होता है और दूसरा पुराण होता है। इतिहास में कोई अमोल नहीं होता, पुराण में कही-सुनी कई बातें जुड़ जाती हैं, कई वास्तविक होती हैं, कई वास्तविक नहीं होती, परंतु प्रेरक सभी होती हैं, उद्बोधक सभी होती हैं।"

भागवत ने कहा, "संघ का पूरा कार्य स्वयंसेवकों के परिश्रम से खड़ा हुआ है, किसी की कृपा से नहीं हुआ है, किसी की अकृपा से रुका भी नहीं है, इसका कारण है कि संघ को अपना मानकर संघ के विचार के अनुसार राष्ट्र का स्वरूप खड़ा करने में सभी स्वयंसेवकों ने अपनी पूरी शक्ति लगा दी।  संघ आज देश के दिशा दर्शन करने वाली शक्ति का रूप लेकर खड़ा है।" 

भागवत ने कहा, "संघ में सभी कार्य संस्कारों के लिए होते हैं। संघ की ये इच्छा नहीं है कि संघ का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाए। संघ पूरे समाज को श्रेय देना चाहता है।"

भागवत ने कहा, "सभी हिंदू समाज को संगठित करने वाले को, स्वर में स्वर मिलाकर, कदम से कदम मिलने का अभ्यास होना चाहिए। शरीर की कृति मन पर परिणाम करती है। शरीर के अभ्यास से मन बनता है ,यह सत्य है, वैज्ञानिक सत्य है।"

हालही में गौहत्या को खत्म करने को लेकर कही थी ये बात

मोहन भागवत ने मंगलवार को ही गौहत्या को खत्म करने को लेकर कुछ बातें कही थीं। उन्होंने कहा था कि कि जन जागरूकता से भारत में गोहत्या को समाप्त करने में मदद मिल सकती है।  जो भावना देश में अयोध्या में राम मंदिर के लिए थी जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया, वही भावना गायों के लिए भी दिखनी चाहिए। समाज को गायों के प्रति समर्पित बनाएं, और गोहत्या तुरंत बंद हो जाएगी। हमें जनता को जागरूक करना होगा।

दरअसल मोहन भागवत मंगलवार को वृंदावन के मलूक पीठ पहुंचे थे और उन्होंने ये बातें मलूक दास जी महाराज की 452वीं जयंती के अवसर पर कहीं।

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