मुंबई: महाराष्ट्र के मुंबई से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आई है। ISI और अंडरवर्ल्ड टेरर केस में बड़ी सफलता मिली है। फरार आतंकी हुफैजा को मुंबई से हिरासत में लिया गया है। महाराष्ट्र ATS और स्पेशल सेल के ज्वाइंट ऑपरेशन में उसे पकड़ा गया है।
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दाऊद के करीबी से था रिश्ता
हुफैजा को पकड़ने के लिए महाराष्ट्र में 3 दिन से रेड चल रही थी और अब जाकर सफलता हासिल हुई है। हुफैजा ही पाकिस्तान में बैठे दाऊद इब्राहिम के करीबी सैयद मुदस्सर हुसैन उर्फ मुन्ना झिंगाड़ा से संपर्क में था।
मुन्ना झिंगाड़ा ही गिरफ्तार आतंकियों का हैंडलर था।
स्पेशल सेल, हुफैजा को बुधवार को कोर्ट में पेश करेगी और फिर प्रोडक्शन वारंट पर दिल्ली लेकर आएगी। हुजैफा की गिरफ्तारी को बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।
कितना खतरनाक है सैयद मुदस्सर हुसैन उर्फ मुन्ना झिंगाड़ा?
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्र बताते हैं कि दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील की उम्र और गिरते जुर्म की दुनिया के ग्राफ के मद्देनजर अंडरवर्ल्ड ने एक बार फिर मुंबई में करवट लेने के लिए अपने पुराने चमचे मुन्ना पर दांव खेला है।
दांव निशाने पर तो सही लगा लेकिन अंजाम तक पहुंचने के पहले ही सुरक्षा एजेंसियों ने उसके मंसूबो पर पानी फेर दिया। लेकिन इतना साफ है अब अंडरवर्ल्ड की कमान झिंगाड़ा के हाथ में आ सकती है।
अंदरखाने में नए लड़कों को D कंपनी को फिर मजबूत करने के लिए हुफैजा जैसे मोहरे काफी हैं, जो सीधे तौर पर मुन्ना के टच में थे।
मुन्ना झिंगाड़ा बैंकाक की जेल में कैदी नंबर 8 था और उसने 17 साल की सजा काटी है। ISI के स्पेशल विमान से मुन्ना झिंगाड़ा को पाकिस्तान लेकर जाया गया था। मुन्ना झिंगाड़ा मुंबई अंडरवर्ल्ड में फिर सक्रिय होने की कोशिश कर रहा है।
मुन्ना झिंगाड़ा के लिए CBI ने थाईलैंड की कोर्ट में भी दलील दी थी। मुन्ना झिंगाड़ा की गिरफ्तारी के बाद CBI ने थाईलैंड की अदालत में उसे भारतीय नागरिक साबित करने के लिए मजबूत सबूत पेश किए थे। भारत ने कोर्ट को बताया कि झिंगाड़ा पर मुंबई में 70 से ज्यादा गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। CBI ने उसके माता-पिता के दस्तावेज, स्कूल रिकॉर्ड और DNA रिपोर्ट अदालत में जमा कराई थी। DNA जांच में झिंगाड़ा का उसके परिवार से पूरा मेल पाया गया था। निचली अदालत में पाकिस्तान और डी-कंपनी का दावा कमजोर पड़ गया था। भारतीय एजेंसियों का मानना था कि भारत आने पर झिंगाड़ा दाऊद इब्राहिम और ISI से जुड़े कई राज खोल सकता था। इसके बाद पाकिस्तान सरकार खुद मामले में शामिल हुई और ऊपरी अदालत में पहुंची। पाकिस्तान ने कुछ दस्तावेज पेश कर दावा किया कि झिंगाड़ा वास्तव में उनका नागरिक मोहम्मद सलीम है। थाईलैंड की ऊपरी अदालत में यह कानूनी लड़ाई कई साल तक चली।
बाद में पाकिस्तान सरकार ने आधिकारिक हलफनामे में उसे अपना नागरिक बताया और उसका पासपोर्ट वैध होने की बात कही। थाई अदालत ने पाकिस्तान सरकार के आधिकारिक दावे को स्वीकार कर लिया। अदालत ने भारत के DNA समेत अन्य सबूतों के बावजूद झिंगाड़ा को पाकिस्तानी नागरिक मान लिया। जिसके बाद पाकिस्तान सरकार विशेष विमान के ज़रिए मुन्ना झिंगाड़ा को पाकिस्तान ले गयी और मुन्ना झिंगाड़ा को सेफ हाउस में शिफ्ट कर दिया गया।