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122 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले का दूसरा आरोपी पकड़ाया, दावा- इसी ने घोटाले के 70 करोड़ रुपये लिए

 Reported By: Rajesh Kumar, Edited By: Shakti Singh
 Published : Feb 16, 2025 02:49 pm IST,  Updated : Feb 16, 2025 02:49 pm IST

मुख्य आरोपी जनरल मैनेजर हितेश मेहता के बाद धर्मेश को गिरफ्तार किया गया है। दावे के अनुसार धर्मेश ने 122 करोड़ के घोटाले में 70 करोड़ रुपये लिए थे।

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न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक Image Source : X/ANI

122 करोड़ रुपये के न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक स्कैम मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने डेवेलपर को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए डेवेलपर का नाम धर्मेश पौन बताया जा रहा है। जांच में पता चला कि धर्मेश ने इस मामले में गबन किये गए 122 करोड़ रुपये में से 70 करोड़ रुपये लिए। आर्थिक अपराध शाखा ने बताया कि मुख्य आरोपी जनरल मैनेजर हितेश मेहता से धर्मेश मई और दिसंबर 2024 में 1.75 करोड़ रुपये और जनवरी 2025 में 50 लाख रुपए मिले हैं।

इस मामले में कल पुलिस ने हितेश मेहता को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। दोनों आरोपियों को मुंबई के किला कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया है। न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के पूर्व महाप्रबंधक हितेश प्रवीणचंद मेहता जब दादर और गोरेगांव शाखाओं के प्रभारी थे तब उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए दोनों शाखाओं के खातों से 122 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की थी।

प्रभादेवी ब्रांच से 112 करोड़ रुपये चुराए

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जब पैसे एक ब्रांच से दूसरे ब्रांच के लिए ट्रांसफर किए जाते थे उस दौरान हितेश मेहता चोरी की वारदात को अंजाम दिया करता था। हितेश मनी ट्रांसफर के दौरान गाड़ी से पैसे निकाल कर अपने घर ले जाता था। आरोपी हितेश मेहता ने प्रभादेवी ब्रांच से 112 करोड़ और गोरेगांव ब्रांच से 10 करोड़ रुपये चुराए थे। 

क्या है पूरा मामला?

न्यू इंडिया कोऑपरेटिव बैंक के एक्टिंग चीफ एकाउंटिंग ऑफिसर देवर्षि घोष ने बताया कि उनकी कंपनी की दो शाखाएं एक प्रभादेवी और दूसरा गोरेगांव में स्थित हैं। दोनों के अलग-अलग फ्लोर पर कैश रखने के लिए एक तिजोरी बनी हुई है, जिसमें बैंक का पैसा रखा जाता है। आरबीआई की तरफ से बैंक की रेगुलर जांच होती है। 12 फरवरी को हुई जांच में प्रभादेवी ब्रांच से लगभग 112 करोड़ रुपए रिकॉर्ड के अनुसार कम मिले। इसके बाद गोरेगांव वाली ब्रांच में भी पैसे कम मिले। 

आरबीआई की जांच के बीच हितेश बैंक में आए। उन्होंने जाकर आरबीआई के अधिकारियों से बातचीत की और कहा कि करीब 122 करोड़ की कमी के लिए वे खुद जिम्मेदार हैं। उन्होंने पैसे निकाले और अपने परिचितों को दे दिए। वह कोविड के समय से पैसे निकालते आ रहे हैं। हितेश के ऊपर बैंक का पूरा पैसा रखने की जिम्मेदारी थी। ऐसे में उन्होंने आसानी से पैसा चोरी कर लिया। हितेश का साथ देने वाले व्यक्ति पर भी मामला दर्ज हुआ और अब उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया है।

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