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ऑटो कंपनियों को लगा झटका, विदेशों में बाइक, थ्री-व्हीलर और कारों की मांग घटने से निर्यात गिरा

 Edited By: Alok Kumar @alocksone
 Published : Mar 12, 2023 01:27 pm IST,  Updated : Mar 12, 2023 01:27 pm IST

कारों का कुल निर्यात नौ फीसदी गिरकर 46,486 इकाई रह गया है जो पिछले वर्ष फरवरी में 51,213 इकाई था। यात्री कारों का निर्यात 25,207 इकाई रहा जो पिछले वर्ष 33,515 इकाई था।

कारों की मांग घटने से निर्यात गिरा- India TV Hindi
कारों की मांग घटने से निर्यात गिरा Image Source : FILE

भारतीय ऑटो कंपनियों झटका लगा है। दरअसल, विदेशों में बाइक, थ्री-व्हीलर और कारों की मांग घटने से उनका निर्यात गिर गया है। आपको बता दें कि देश की कई ऑटो कंपनियां दुनिया के कई देशों में अपनी गाड़ियों को बेचती है। सियाम की रिपोर्ट के अनुसार, भारत से दोपहिया, तीन पहिया और यात्री वाहनों का निर्यात फरवरी में 35 प्रतिशत घट गया है। इसकी मुख्य वजह गंतव्य देशों विशेषकर अफ्रीका महाद्वीप में अमेरिकी डॉलर की तुलना में मुद्राओं में कमजोरी आना है। उद्योग संगठन सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के आंकड़ों के मुताबिक पिछले महीने दोपहिया, यात्री वाहन और तीन पहिया वाहनों का निर्यात घटकर 3,01,561 इकाई रह गया जो फरवरी 2022 में 4,63,025 इकाई था। इन आंकड़ों के मुताबिक फरवरी 2022 में 3,75,689 दो पहिया वाहनों का निर्यात हुआ था जो इस वर्ष फरवरी में 37 प्रतिशत घटकर 2,35,087 इकाई रह गया। तीन पहिया वाहनों का कुल निर्यात फरवरी 2022 की 35,997 इकाइयों की तुलना में 45 प्रतिशत गिरकर 19,640 इकाई रह गया।

कारों का निर्यात नौ फीसदी गिरा 

यात्री वाहनों का कुल निर्यात नौ फीसदी गिरकर 46,486 इकाई रह गया है जो पिछले वर्ष फरवरी में 51,213 इकाई था। यात्री कारों का निर्यात 25,207 इकाई रहा जो पिछले वर्ष 33,515 इकाई था। मोटरसाइकिल निर्यात 2,01,097 इकाई रहा है जो पिछले वर्ष फरवरी में 3,49,221 इकाई था। हालांकि स्कूटर निर्यात पिछले वर्ष की 24,830 इकाई की तुलना में इस वर्ष फरवरी में बढ़कर 33,378 इकाई पर पहुंच गया। 

डॉलर के मुकाबले मुद्राओं का अवमूल्यन मुख्य वजह 

सियाम के महानिदेशक राजेश मेनन ने कहा, बीते कुछ महीनों से दो पहिया, तीन पहिया और वाणिज्यिक वाहनों के निर्यात में गिरावट देखने को मिल रही है क्योंकि कई स्थानों विशेषकर अफ्रीका तथा अन्य विकासशील देशों की मुद्राओं में अवमूल्यन हुआ है। उन्होंने कहा कि ये देश विदेशी कोष की उपलब्धता को लेकर परेशानी का सामना कर रहे हैं जिससे वाहनों की बिक्री सीमित हो रही है और देश आवश्यक वस्तुओं के आयात पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। हालांकि इन बाजारों में उपभोक्ताओं की ओर से वाहनों की मांग बनी हुई है।

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